साप्ताहिक समीक्षा- गेहूं
17-May-2025 08:03 PM
व्यापारिक मांग मजबूत रहने से यूपी में गेहूं का भाव तेज
नई दिल्ली। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद 15 मई 2025 तक बढ़कर 294.62 लाख टन पर पहुंच गई लेकिन इसमें मध्य प्रदेश का विशेष योगदान रहा।
सरकारी खरीद
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में सरकारी एजेंसियों को 30 लाख टन के नियत लक्ष्य के मुकाबले केवल 10 लाख टन गेहूं खरीदने का अवसर मिल सका है क्योंकि वहां फ्लोर मिलर्स / प्रोसेसर्स एवं व्यापारियों / स्टॉकिस्टों की सक्रियता ज्यादा देखी जा रही है जो किसानों से केन्द्र सरकार द्वारा घोषित 2425 रुपए प्रति क्विंटल से ऊंचे दाम पर गेहूं की खरीद कर रहे हैं।
भाव
10 से 16 मई वाले सप्ताह के दौरान आमतौर पर गेहूं का भाव राष्ट्रीय स्तर पर या तो स्थिर या कुछ ऊंचा रहा। दिल्ली में दाम 15 रुपए सुधरकर 2745/2750 रुपए प्रति क्विंटल तथा इंदौर में 80 रुपए बढ़कर 2400/3940 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा मगर राजकोट में 100 रुपए तथा देवास में 50 रुपए घट गया।
एमपी / राजस्थान
मध्य प्रदेश की अन्य अधिकांश मंडियों में भाव स्थिर हो गया। राजस्थान की मंडियों में भी गेहूं के मूल्य में कोई खास उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया जबकि वहां कोटा और बूंदी की मंडी में गेहूं की भारी आवक का सिलसिला जारी रहा। राजस्थान में गेहूं की सरकारी खरीद पर किसानों को एमएसपी से ऊपर 150 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है जिससे पिछले साल के मुकाबले इस बार लगभग दोगुनी बढ़ोत्तरी हो गई है। मध्य प्रदेश में भी 175 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिए जाने से गेहूं की खरीद में शानदार बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। सिर्फ उत्तर प्रदेश गेहूं खरीद के मामले में काफी पीछे चल रहा है।
उत्तर प्रदेश
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान उत्तर प्रदेश की विभिन्न मंडियों में गेहूं के दाम में 15 से 30 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई जबकि गोरखपुर में भाव 80 रुपए उछलकर 2520 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। मंडियों में गेहूं की आवक सामान्य से कुछ कम हो रही है जबकि व्यापारिक मांग मजबूत बनी हुई है। कुछ मंडियों में दाम घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ गया था लेकिन अब सुधरकर उससे ऊपर पहुंच गया है।
व्यापारिक खरीद
समझा जाता है कि पिछले साल के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान गेहूं की व्यापारिक खरीद में कम से कम 5 लाख टन का इजाफा हुआ है। यूपी में गेहूं की कीमतों में कोई अप्रत्याशित इजाफा नहीं हुआ है लेकिन फिर भी सरकारी क्रय केन्द्रों पर इसकी आवक कम हो रही है।
