साप्ताहिक समीक्षा- सरसों

11-Oct-2025 08:01 PM

क्रशिंग-इकाइयों की लिवाली से सरसों में 50-100 रुपए की तेजी 
 
नई दिल्ली। क्रशिंग- प्रोसेसिंग इकाइयों की सीमित लिवाली तथा मंडियों में सामान्य आवक के चलते 4-10 अक्टूबर वाले सप्ताह के दौरान सरसों का भाव या तो स्थिर रहा या इसमें 50-100 रुपए प्रति क्विंटल का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। 
बिजाई 
रबी सीजन की सबसे प्रमुख तिलहन फसल- सरसों की बिजाई का सीजन औपचारिक तौर पर आरंभ हो गया है और ऊंचे बाजार बह्व तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में हुई अच्छी बढ़ोत्तरी के कारण इसका क्षेत्रफल बढ़ने के आसार है। 
42% कंडीशन सरसों  
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान 42 प्रतिशत कंडीशन वाली सरसों का भाव दिल्ली में 100 रुपए बढ़कर 7100 रुपए प्रति क्विंटल तथा जयपुर में 50 रुपए सुधरकर 7150 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। गुजरात में सामान्य औसत क्वालिटी की सरसों में 50-60 रुपए की तेजी रही। हरियाणा में सिरसा में दाम 100 रुपए तेज रहा मगर हिसार में 100 रुपए गिरकर 6300/6600 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया।
मध्य प्रदेश 
मध्य प्रदेश की मुरैना, पोरसा एवं ग्वालियर मंडी में सरसों का मूल्य पिछले स्तर पर कायम रहा और उत्तर प्रदेश की हापुड़ तथा आगरा मंडी में भी इसके दाम में कोई खास उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया लेकिन कोलकाता में यह 50 रुपए नरम रहा। सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में सरसों का दाम भरतपुर, बूंदी, नेवाई एवं टोंक में कुछ सुधर गया जबकि बीकानेर में 100 रुपए नरम पड़ गया।
सरसों तेल  
सरसों की भांति सरसों तेल एक्सपेलर एवं कच्ची घानी के दाम में सीमित उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। दिल्ली में एक्सपेलर का भाव 5 रुपए सुंदरकार 1455 रुपए प्रति 10 किलो तथा चरखी दादरी में 15 रुपए बढ़कर 1480 रुपए प्रति 10 किलो हो गया। इसी तरह कच्ची घानी सरसों तेल का मूल्य आगरा में 30 रुपए उछलकर 1480 रुपए तथा कोलकाता में 20 रुपए बढ़कर 1610 रुपए प्रति 10 किलो पर पहुंचा।
आवक  
मंडियों में ऊंचे भाव के कारण सरसों की सामान्य आवक हो रही है। लगभग सभी प्रमुख मंडियों में सरसों का दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा है जिससे चालू रबी सीजन के दौरान इसकी खेती में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बढ़ने की उम्मीद है। 
एमएसपी में बढ़ोत्तरी 
सरकार ने 2025-26 के मार्केटिंग सीजन हेतु सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अच्छी बढ़ोत्तरी की है। किसानों, व्यापारियों एवं सरकारी एजेंसियों के पास सरसों का अच्छा स्टॉक मौजूद है जिससे इसकी नियमित आपूर्ति होती रहेगी।