सरकारी गेहूं की कमजोर बिक्री

21-Feb-2026 11:52 AM

केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने अपनी अधीनस्थ एजेंसी- भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान 30 लाख टन गेहूं की बिक्री खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत करने की अनुमति दी थी और निगम ने 12 नवम्बर 2025 से इसके लिए ई-नीलामी का आयोजन भी शुरू कर दिया।

लेकिन कुछ खास कारणों से इस गेहूं की खरीद में मिलर्स-प्रोसेसर्स ने अपेक्षित दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसका परिणाम यह हुआ कि 12 नवम्बर 2025 से लेकर 18 फरवरी 2026 तक आयोजित कुल आठ नीलामी में करीब 11.31 लाख टन गेहूं की बिक्री का ऑफर दिया गया जिसमें से केवल 6.75 लाख टन की खरीद के लिए बोली लगाई गई और महज 6.22 लाख टन गेहूं की वास्तविक बिक्री हो सकी।

इस तरह कुल ऑफर के सापेक्ष केवल 55 प्रतिशत गेहूं बिक सका जबकि शेष 45 प्रतिशत स्टॉक अनबिका रह गया। समझा जाता है कि मध्य मार्च तक नीलामी की प्रकिया जारी रहेगी लेकिन मिलर्स-प्रोसेसर्स के अत्यन्त कमजोर रिस्पांस को देखते हुए प्रतीत होता है

कि वर्तमान वित्त वर्ष की पूरी अवधि में सरकारी गेहूं की कुल बिक्री 9 लाख टन से भी कम हो सकती है। पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में खाद्य निगम लगभग 30 लाख टन गेहूं बेचने में सफल हुआ था जबकि उससे पूर्व यह आंकड़ा एक बार 100 लाख टन के करीब पहुंच गया था। 

हालांकि एफसीआई के गेहूं की बिक्री बढ़ाने तथा कमजोर बाजार भाव को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरकार ने गेहूं पर लागू भंडारण सीमा के आदेश को वापस ले लिया मगर इसका कोई सार्थक नतीजा सामने नहीं आया। इसी तरह सरकार ने 25 लाख टन गेहूं एवं 10 लाख टन गेहूं उत्पादों (आटा, मैदा, सूजी आदि) के व्यापारिक निर्यात की स्वीकृति दी है

मगर इससे घरेलू बाजार पर पड़ने वाले संभावित असर का पता बाद में चलेगा। इस बीच गेहूं उत्पादों के निर्यात को प्रतिबंधित या कोटा प्रणाली की सूची से बाहर निकाल कर पूरी तरह नियंत्रण मुक्त करने की मांग उठने लगी है। जिस पर सरकार को गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए। गेहूं का अगला उत्पादन बम्पर होने की उम्मीद है और उद्योग की नजर सरकार की नीति पर टिकी हुई है।