सरकारी सहयोग नहीं मिलने पर बढ़ सकता है चीनी उद्योग का संकट
29-Dec-2025 04:45 PM
मुम्बई। स्वदेशी चीनी उद्योग के वर्तमान समय में अनेक चुनौतियों कठिनाइयों एवं बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है जिसके निस्तारण के लिए उसे सरकार से नीतिगत सहयोग समर्थन एवं प्रोत्साहन की सख्त आवश्यकता है।
एक तरफ गन्ना की अच्छी पैदावार से चीनी का उत्पादन एवं स्टॉक काफी बढ़ने की संभावना है तो दूसरी ओर इसके दाम में नरमी का माहौल देखा जा रहा है।
इसी तरह सरकार ने चीनी का निर्यात कोटा 2024-25 सीजन के 10 लाख टन से बढ़ाकर 2025-26 सीजन के लिए 15 लाख टन निर्धारित कर दिया है लेकिन एथनॉल निर्माण में चीनी का उपयोग घटकर 34-35 लाख टन पर सिमट जाने की संभावना है क्योंकि तेल विपणन कंपनियों से चीनी से निर्मित एथनॉल का सीमित कोटा आवंटित किया है।
उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण मांग चीनी के एक्स फैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य में बढ़ोत्तरी की है। फरवरी 2019 में अंतिम बार चीनी का एक्स फैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) 200 रुपए बढ़ाकर 3100 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था और उसके बाद से इसमें कोई इजाफा नहीं हुआ है
जबकि इस बीच गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में प्रत्येक वर्ष वृद्धि होती रही और कुछ प्रांतों में राज्य समर्थित मूल्य (सैप) भी बढ़ाया गया जो एफआरपी से काफी ऊंचा होता है। पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा तथा कर्नाटक में सैप की व्यवस्था लागू है।
गन्ना की कीमतों में नियमित रूप से हुई बढ़ोत्तरी के कारण चीनी उत्पादन का लागत खर्च लगातार बढ़ता रहा जबकि एक्स फैक्टरी एमएसपी में कोई बदलाव नहीं होने से उद्योग की परेशानी बढ़ गई।
चीनी का लागत खर्च उछलकर 3900-4000 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है जबकि मिलों को 3600-3700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अपनी चीनी बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
इस तरह चीनी के उत्पादन एवं कारोबार पर मिलों को कम से कम 300-400 रुपए प्रति क्विंटल का आर्थिक घाटा हो रहा है। इससे गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान करने में चीनी मिलों को भारी कठिनाई हो सकती है।
विशाल उत्पादन एवं सीमित निकासी के कारण उद्योग के पास चीनी का स्टॉक बढ़ जाएगा और उसकी क्रियाशील पूंजी फंस जाएगी।
गन्ना उत्पादकों को सही समय पर बकाया मूल्य का भुगतान नहीं हुआ तो उसकी मुसीबत बढ़ जाएगी। सरकार को इन तमाम बिंदुओं पर गहन मंचन करके जल्दी से जल्दी यथोचित निर्णय लेना चाहिए।
