सरसों का रकबा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल के निकट पहुंचा
24-Nov-2025 08:27 PM
नई दिल्ली। रबी सीजन की सबसे प्रमुख तिलहन फसल- सरसों की जोरदार बिजाई जारी है और अगले महीने भी चलती रहेगी। इसका थोक मंडी भाव मई 2025 से ही न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा है जिससे किसानों को आकर्षक आमदनी प्राप्त हो रही है और इसलिए इसकी खेती में भरपूर दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
इसके फलस्वरूप 21 नवम्बर 2025 तक सरसों का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 73.80 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 69.58 लाख हेक्टेयर से 4.22 लाख हेक्टेयर अधिक है। इस वर्ष सरसों का सामान्य औसत क्षेत्रफल 79.17 लाख हेक्टेयर आंका गया है जो पिछले पांच साल की बिजाई का औसत है।
जिस तेज रफ्तार से सरसों की बिजाई हो रही है उसे देखते हुए लगता है कि शीघ्र ही इसका रकबा सामान्य औसत क्षेत्रफल को पार कर जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि चालू रबी सीजन के अंत तक राष्ट्रीय स्तर पर सरसों का कुल उत्पादन क्षेत्र 90-100 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा।
सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों- राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, पश्चिम बंगाल एवं बिहार आदि में सरसों की अच्छी बिजाई हो रही है और आगामी महीनों के दौरान यदि मौसम की हालत अनुकूल रही तो इसका शानदार उत्पादन हो सकता है।
2023-24 की तुलना में 2024-25 सीजन के दौरान सरसों के उत्पादन में थोड़ी गिरावट आ गई क्योंकि इसकी बिजाई कम क्षेत्रफल में हुई थी। 2025-26 के रबी सीजन में सरसों का बेहतर उत्पादन होने के आरंभिक संकेत मिल रहे हैं।
अक्टूबर में बोई गई सरसों के नए माल की आवक फरवरी 2026 से आरंभ होने की संभावना है। अन्य रबी तिलहन फसलों की बिजाई ज्यादा उत्साहवर्धक नहीं है। मूंगफली और अलसी का रकबा गत वर्ष से काफी पीछे चल रहा है।
