तिलहनों के रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन के बावजूद खाद्य तेलों के आयात में इजाफा

25-Nov-2025 04:13 PM

मुम्बई। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 2024-25 के मार्केटिंग सीजन के दौरान तिलहन फसलों का सकल घरेलू उत्पादन 2023-24 सीजन की तुलना में 32.20 लाख टन बढ़कर 429.89 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया लेकिन फिर भी विदेशी खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता में कमी नहीं आई और न ही निर्यात पर खर्च होने वाली राशि में कटौती संभव हो सकी।

2024-25 के सीजन में 152.68 लाख टन सोयाबीन तथा 119.42 लाख टन मूंगफली का उत्पादन आंका गया और इन दोनों दलहनों की पैदावार में 10-10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई लेकिन सरसों का उत्पादन कुछ घट गया। 

तिलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ने से खाद्य तेलों के आयात में कमी आनी चाहिए थी मगर इसके विपरीत आयात में थोड़ी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। हालांकि 2023-24 सीजन की तुलना में 2024-25 सीजन के दौरान पाम तेल का आयात घट गया मगर सोयाबीन तेल के रिकॉर्ड आयात ने उसकी क्षतिपूर्ति कर दी। खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती का भी असर देखा गया। 

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) का कहना है कि तिलहन फसलों का उत्पादन अनुमान लगाते समय सरकार को उद्योग की राय जानने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि अक्सर उद्योग की तुलना में सरकारी उत्पादन अनुमान बहुत बड़ा होता है जिस पर विश्वास करना मुश्किल रहता है और बाजार की धारणा भी प्रभावित होती है। 

चालू रबी सीजन के दौरान 21 नवम्बर तक तिलहन फसलों का कुल रकबा बढ़कर 76.64 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो गत वर्ष की तुलना में 3 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। इस बार तिलहनों का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 86.78 लाख हेक्टेयर आंका गया है जिसके मुकाबले वास्तविक रकबा महज 10 लाख हेक्टेयर पीछे है।

तिलहन फसलों की बिजाई का अभियान जारी है। सबसे प्रमुख तिलहन-सरसों के बिजाई क्षेत्र में 4.22 लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। इसके आगामी उत्पादन में 2024-25 के मुकाबले 8-10 लाख टन की वृद्धि होने का अनुमान है।