तुवर एवं उड़द का शुल्क मुक्त आयात जारी रहने पर कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव के आसार

27-Dec-2025 01:33 PM

मुम्बई। दो महत्वपूर्ण दलहन-अरहर (तुवर) एवं उड़द के शुल्क मुक्त आयात की समयसीमा फिलहाल 31 मार्च 2026 तक निर्धारित है लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार इसे आगे बढ़ाने का निर्णय ले सकती है। यदि अगले वित्त वर्ष के दौरान भी शुल्क मुक्त आयात जारी रहा तो दलहनों की कीमतों में ज्यादा तेजी-मंदी की संभावना क्षीण पड़ सकती है।

इस वर्ष तुवर एवं उड़द का उत्पादन एक बार फिर घरेलू मांग एवं खपत से कम होने की संभावना है इसलिए विदेशों से इसके आयात की जरूरत बनी रहेगी। वैश्विक बाजार मूल्य अभी नरम चल रहा है। 

भारत में उड़द का आयात मुख्यत: म्यांमार एवं ब्राजील से तथा तुवर का आयात म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों (तंजानिया, मोजाम्बिक एवं मलावी आदि) से होता है। व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू उत्पादन लगभग गत वर्ष के बराबर होने तथा विदेशों से शुल्क मुक्त आयात की प्रक्रिया जारी रहने पर घरेलू प्रभाग में तुवर एवं उड़द की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी हद तक सुगम रहेगी जिससे कीमतों में स्थिरता रह सकती है। 

समीक्षकों के अनुसार वर्ष 2026 के कुछ शुरूआती महीनों के दौरान दाल-दलहनों के दाम में थोड़ी-बहुत तेजी आ सकती है लेकिन इसकी तीव्रता ज्यादा नहीं होगी। यदि आपूर्तिकर्ता देशों में भाव बढ़ता है तब आयात खर्च ऊंचा हो सकता है।

अफ्रीकी देशों में तुवर की आपूर्ति का ऑफ सीजन शुरू होने पर भारतीय आयातकों का ध्यान म्यांमार की तुवर पर केन्द्रित हो जाएगा और तब वह अवसर का लाभ उठाने के लिए भाव बढ़ा सकता है। 

एक अग्रणी व्यापारिक संगठन- इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के अनुसार तुवर और उड़द के शुल्क मुक्त आयात की अवधि 31 मार्च 2026 से आगे एक और साल के लिए बढ़ाए जाने की संभावना है। इसका स्पष्ट कारण भी मौजूद है। स्वदेशी उत्पादन पर्याप्त नहीं होने से आयात की आवश्यकता आगे भी बनी रहेगी।

सरकार नहीं चाहती है कि दलहनों के घरेलू बाजार मूल्य में जोरदार तेजी आए क्योंकि इससे आम उपभोक्ताओं की कठिनाई बढ़ सकती है। भारत में उड़द का उत्पादन 2021-22 सीजन से ही घट रहा है। सरकार ने 2025-26 के खरीफ सीजन में भी उत्पादन 10 प्रतिशत घटकर 12 लाख टन रह जाने का अनुमान लगाया है। 

चना और मसूर पर 10-10 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू है और आगामी समय में इसमें भी कोई बदलाव होना मुश्किल लगता है।