तुवर के आयात में भारतीय व्यापारियों की दिलचस्पी बरकरार

17-Jul-2025 08:37 PM

मुम्बई। भारत में म्यांमार के साथ-साथ अफ्रीकी देशों से भी भारी मात्रा में अरहर (तुवर) का आयात जारी है। सरकार ने भी इस महत्वपूर्ण दलहन के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है जबकि घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता सामान्य होने से कीमतों पर कुछ हद तक दबाव बना हुआ है। इससे आयात की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। 

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यानी अप्रैल-जून 2025 के दौरान देश में तुवर का आयात बढ़कर 2,42,747 टन पर पहुंच जाने का अनुमान है जो पिछले साल की समान अवधि के आयात 2,07,076 टन से 35,671 टन ज्यादा है।

समीक्षाधीन अवधि के दौरान तुवर का आयात अप्रैल में 61,978 टन से उछलकर 99,545 टन पर पहुंचा और मई में भी 60,272 टन से बढ़कर 96,352 टन पर पहुंचने का अनुमान है लेकिन जून  84,827 टन से घटकर 46,849 टन पर सिमट जाने की संभावना है।

मार्च-अप्रैल में म्यांमार में तुवर की नई फसल आने लगती है और तब इसके निर्यात शिपमेंट की गति तेज हो जाती है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। उधर अफ्रीकी देशों में तुवर की नई फसल की कटाई-तैयारी अगस्त-सितम्बर में आरंभ होती है। आगामी महीनों में म्यांमार के साथ-साथ अफ्रीकी देशों से भी तुवर का आयात जोर पकड़ सकता है। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 की सम्पूर्ण अवधि (अप्रैल-मार्च के दौरान भारत में तुवर का आयात तेजी से बढ़कर  12,23,292 टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया जो 2023-24 के आयात 7.71 लाख टन, 2022-23 के शीर्ष आयात 8.95 लाख टन तथा वित्त वर्ष 2021-22 के आयात 8.40 लाख टन से काफी अधिक रहा। इससे पूर्व जब देश में वार्षिक कोटा प्रणाली लागू थी तब वर्ष 2020-21 में 4,42,623 टन एवं 2019-20 में 4,49,777 टन तुवर का आयात हुआ था। 

वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान अगस्त 2024 से तुवर का आयात जोर पकड़ने लगा था और दिसम्बर तक इसका सिलसिला जारी रहा। सितम्बर 2024 में करीब 1.90 लाख टन, अक्टूबर में 2.60 लाख टन, नवम्बर में 1.86 लाख टन एवं दिसम्बर 2024 में 1.14 लाख टन तुवर का आयात हुआ था।