तुवर के कुल आयात में 2 लाख टन तक की कमी आने की संभावना

27-Sep-2024 06:31 PM

मुम्बई । हालांकि भारत में चालू वित्त वर्ष (2024-25) में शुरूआती चार महीनों में यानी अप्रैल-जुलाई 2024 के दौरान तुवर का आयात बढ़कर 2,75,393 टन पर पहुंच गया जो पिछले साल की समानअवधि के आयात 172448 टन से करीब 60 प्रतिशत अधिक रहा लेकिन पूरे वित्त वर्ष के दौरान इसका कुल आयात गत वर्ष के लगभग 10 लाख टन से घटकर इस बार 8 लाख टन के आसपास सिमट जाने की संभावना है।

म्यांमार में तुवर फसल की बिजाई समाप्त हो चुकी है और इसकी कटाई-तैयारी जनवरी 2025 में आरंभ होगी। वहां तुवर का स्टॉक घटकर 25-30 हजार टन रह जाने की संभावना है क्योंकि मार्केटिंग सीजन का अधिकांश समय बीत चुका है और निर्यात प्रदर्शन भी बेहतर रहा। 

अपुष्ट खबरों के मुताबिक मोजाम्बिक सरकार ने तुवर का न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) 1100-1150 डॉलर प्रति टन  निर्धारित किया है लेकिन अभी तक सरकारी तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

यदि यह ऊंचा मेप नियत होता है तो वहां उत्पादकों को बेहतर वापसी प्राप्त होगी। ज्ञात हो कि मोजाम्बिक अफ्रीका महाद्वीप में तुवर का सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक देश है। 

घरेलू प्रभाग में अरहर का बिजाई क्षेत्र पिछले साल के 40.74 लाख हेक्टेयर से 5.81 लाख हेक्टेयर बढ़कर इस बार 46.55 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है लेकिन दोनों शीर्ष उत्पादक राज्यों- कर्नाटक तथा महाराष्ट्र के साथ-साथ मध्य प्रदेश,

गुजरात एवं आंध्र प्रदेश में भी भारी वर्षा होने तथा बाढ़ आने से इसकी फसल को कुछ नुकसान होने की आशंका है। केन्द्र सरकार ने तुवर का घरेलू उत्पादन 2022-23 सीजन के 33.12 लाख टन से 1.05 लाख टन बढ़कर 2023-24 के सीजन में 34.17 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान लगाया है।

उद्योग- व्यापार क्षेत्र के समीक्षकों का मानना है कि यदि आगामी महीनों में मौसम अनुकूल रहा और कोई अनैच्छिक प्राकृतिक प्रकोप सामने नहीं आया तो 2024-25 के वर्तमान सीजन में तुवर का उत्पादन बढ़कर 40-42 लाख टन तक पहुंच सकता है।

उधर सरकार को भरोसा है कि इस बार इसका कुल उत्पादन 45-46 लाख टन पर पहुंच जाएगा जिससे विदेशों से इसके आयात की आवश्यकता घट जाएगी।