तुवर-उड़द का शुल्क मुक्त आयात जारी रहने पर कीमतों में तेजी की संभावना क्षीण
29-Dec-2025 08:17 PM
मुम्बई। उड़द एवं तुवर की फसल खरीफ सीजन में कमजोर रही और रबी कालीन बिजाई भी उड़द के लिए उत्साहवर्धक नहीं है।
हालांकि सरकार ने तुवर का उत्पादन सुधरने का अनुमान लगाया है और यदि इसे सही मान लिया जाए तब भी घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशों से विशाल मात्रा में इसके आयात की आवश्यकता पड़ेगी। भारत में तुवर का आयात मुख्यतः म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों तथा उड़द का आयात म्यांमार एवं ब्राजील से होता है।
इन दोनों महत्वपूर्ण दलहन फसलों का उत्पादन घरेलू जरूरत से कम होता है इसलिए इसके आयात की आवश्यक बनी रहती है वैश्विक बाजार में इसका समुचित स्टॉक मौजूद है और कीमतों में भी ज्यादा तेजी के संकेत नहीं मिल रहे हैं।
भारत में तुवर और उड़द का शुल्क मुक्त आयात 31 मार्च- 2026 तक जारी रखने की घोषणा पहले ही हो चुकी है और ऐसा लगता है कि सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए भी इस नीति को बरकरार रख सकती है।
घरेलू प्रभाग में इन दोनों दलहनों का भाव सीमित उतार-चढ़ाव के साथ एक निश्चित सीमा में लगभग स्थिर बना हुआ है। खरीफ कालीन उड़द की आवक तो पहले से हो रही है जबकि अब तुवर के नए माल का आना भी आरंभ हो चुका है।
अगर तुवर-उड़द के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 31 मार्च 2026 से आगे बढ़ाई जाती है तो इसके घरेलू बाजार भाव में भारी तेजी आने की संभावना क्षीण पड़ जाएगी।
इससे अगले खरीफ सीजन में किसानों को बिजाई क्षेत्र बढ़ाने का पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल सकेगा। अन्य दलहनों पर भी आयात शुल्क की दर में ज्यादा बदलाव होना कठिन लगता है।
