त्यौहारी मांग से चना के साथ -साथ तुवर का दाम भी तेज होने की संभावना

05-Sep-2024 08:25 PM

नई दिल्ली। यद्यपि घरेलू प्रभाग में पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने एक तरफ चना (देसी) तथा अरहर (तुवर) पर भंडारण सीमा का नियम लागू कर रखा है और दूसरी ओर विदेशों से इसके शुल्क मुक्त आयात की  अनुमति दे रखी है लेकिन इसका कोई खास सकारात्मक असर नहीं देखा जा रहा है।

घरेलू थोक मंडियों में इसकी आवक कम हो रही है और विदेशों से भी इसका सीमित आयात हो रहा है। आपूर्ति एवं उपलब्धता की जटिल स्थिति को देखते हुए तुवर और चना के उत्पादन के लिए सरकार द्वारा लगाए गए अनुमान पर संदेश उत्पन्न होना स्वाभाविक ही है।

जब देसी चना का भाव मसूर से आगे निकलकर उड़द के आसपास पहुंच जाये और तुवर का दाम 100 रुपए प्रति क्विंटल से ऊंचा हो तो निश्चित रूप से यही माना जाएगा कि इसका उत्पादन घरेलू मांग एवं जरूरत से बहुत कम हुआ है। 

सरकार ने चना की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पीली मटर के आयात को पूरी तरह खोल दिया और संयोग से विदेशों से इसका विशाल आयत भी हो गया मगर ऐसा प्रतीत होता है कि पीली मटर चना का बेहतर विकल्प साबित नहीं हो सकी और न ही देसी चना के दाम पर दबाव बनाने में सफल हुई।

आमतौर पर त्यौहारी सीजन में बेसन वालों की जोरदार मांग निकलने से चना का भाव तेज हो जाता है मगर यह 8000 रुपए प्रति क्विंटल के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगा- इसकी संभावना नहीं बन रही थी।

समझा जाता है कि मध्य अक्टूबर में जब ऑस्ट्रेलिया में नए चने की आवक शुरू होगी और भारत में जोरदार आयात होने लगेगा तभी इसके दाम में थोड़ी नरमी आ सकेगी।

नवम्बर में त्यौहारी सीजन भी समाप्त हो जाएगा। अत्यन्त ऊंचे दाम को देखते हुए आगामी रबी सीजन में चना की बिजाई भी बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।