दक्षिण-पश्चिम मानसून की आगे बढ़ने की गति सामान्य

12-May-2025 04:43 PM

तिरुअनन्तपुरम। अगले महीने से देश में सक्रिय होने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने मूल उद्गम स्थान पर न केवल उपस्थित हो गया है बल्कि सामान्य चाल से आगे भी बढ़ रहा है।

बंगाल की खाड़ी अंडमान सागर, लक्का दीव  सागर, अरब सागर, श्रीलंका के तटवर्ती क्षेत्रों और केरल तट पर मानसून इस बार सही समय पर पहुंचने की उम्मीद है।

इस बीच देश के अंदर मानसून पूर्व की भी अच्छी वर्षा होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। सम्पूर्ण विषुवतीय क्षेत्र के आरपार हवा का प्रवाह सुगम बना हुआ है।

अफ्रीका के पूर्वी तट की और नमी युक्त हवा का प्रवाह हो रहा है। समुद्र से नमी लेकर यह हवा तेजी से आगे बढ़ रही है। समय गुजरने के साथ यह प्रवाह बंगाल की खाड़ी के ऊपर पहुंचेगा।

उसके बाद यह लक्का दीव और फिर दक्षिण-पूर्वी अरब सागर में पहुंच जाएगा। उसके बाद श्रीलंका के तट से होते हुए मानसून की हवा केरल के दक्षिणी तट पर पहुंचेगी। 

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार दक्षिणी अंडमान सागर और उससे सटे सुदूर दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर मानसून को जल्दी ही पहुंचने की संभावना है।

उधर यूरोपीय मौसम पूर्वोनुमान केन्द्र का कहना है कि दक्षिण-पश्चिमी हवा को साथ लेकर मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। कुछ दिनों में इस हवा की गति 36 से 54 घंटा प्रति किलोमीटर तक बढ़ सकती है जो 15 से 40 कि०मी० प्रति घंटा की सामान्य चाल से काफी ज्यादा है।

बंगाल की खाड़ी के ऊपर इसका तेज प्रवाह देखा जा रहा है। हवा की यह रफ्तार कम से कम 20 मई तक बरकरार रहने की संभावना है जिससे मानसून को आगे बढ़ने में अच्छी सहायता मिलेगी। 

दक्षिण-पश्चिम मानसून को भारतीय कृषि क्षेत्र का ऑक्सीजन माना जाता है क्योंकि देश में करीब 70 प्रतिशत वर्षा इसी सीजन यानी जून से सितम्बर के चार महीनों में होती है। यह चार महीना खरीफ फसलों की बिजाई और प्रगति का समय होता है।

खरीफ सीजन में धान, तुवर, उड़द, मूंग, सोयाबीन, तिल, मूंगफली, अरंडी, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, कपास एवं गन्ना सहित कई अन्य फसलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। मानसून की अच्छी बारिश इन फसलों के बेहतर उत्पादन की उम्मीद रहती है।