दाल-दलहनों का भाव दीर्घकाल में मजबूत रहने का अनुमान
07-May-2025 01:15 PM
नई दिल्ली। सरकार बफर स्टॉक में दलहन की मात्रा कम है। हालांकि मूंग और मसूर का स्टॉक सामान्य स्तर से ऊंचा है और तुवर की सरकारी खरीद भी बढ़ी है मगर उड़द और चना के स्टॉक में भारी कमी आने से सरकार की चिंता बढ़ गई है।
एक अग्रणी रेटिंग एजेंसी के अनुसार पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की वजह से पिछले कुछ महीनों के दौरान दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने तथा कीमतों को घटाने में सहायता मिली है लेकिन आगामी महीनों में सरकार को आपूर्ति की स्थिति को बेहतर बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है।
दिसम्बर 2023 में पहली बार पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गई थी और बाद में कई बार इसकी अवधि बढ़ाई गई। अंतिम बार मार्च में इसकी समय सीमा 31 मई 2025 तक के लिए बढ़ाई गई।
इसके बाद क्या होगा, यह अभी किसी को नहीं पता। चना और मसूर का दाम घटकर यदि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे आता है और सरकारी एजेंसियों को बफर स्टॉक के लिए इसकी खरीद में अच्छी सफलता मिलती है तब सरकार पीली मटर के आयात पर अंकुश लगाने के बारे में विचार कर सकती है।
यदि चना की खरीद में बाधा पड़ी तो पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात को रोकना मुश्किल हो सकता है। चना और मटर आम लोगों का दलहन और एक-दूसरे के पूरक या विकल्प है। पीली मटर के अत्यन्त विशाल एवं सस्ते आयात के कारण ही चना का घरेलू बाजार भाव अपने शीर्ष स्तर से घटकर काफी नीचे आया है।
सरकार ने मई 2024 में देसी चना के आयात को भी शुल्क मुक्त कर दिया था जिससे इसका आयात बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
31 मार्च को इसके शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा समाप्त हो रही थी मगर उससे पूर्व ही इस पर मसूर की भांति 11 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा दिया गया।
इस बार सरकार ने प्रमुख उत्पादक राज्यों में कुल 28 लाख टन चना खरीदने की स्वीकृति दी है मगर खरीद की गति अभी तक काफी धीमी चल रही है। इससे दलहनों का बफर स्टॉक तेजी से नहीं बढ़ रहा है।
