दलहनों का उत्पादन बढ़ाने हेतु समर्थन मूल्य पर खरीद का संकल्प ही पर्याप्त नहीं
24-Nov-2025 06:14 PM
नई दिल्ली। यद्यपि भारत सरकार ने अगले पांच वर्षों में देश को दलहनों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का प्लान बनाते हुए 2030-31 के सीजन तक इसका घरेलू उत्पादन बढ़ाकर 350 लाख टन तक पहुंचने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है और इसके लिए जोरदार प्रयास भी आरंभ कर दिया है
लेकिन उद्योग-व्यापार क्षेत्र का कहना है कि सरकार का दायित्व केवल कुछ दलहनों की खरीद के संकल्प तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार पहले ही यह घोषणा कर चुकी है कि सरकारी क्रय केन्द्रों पर तुवर, उड़द एवं मसूर की जो भी मात्रा पहुंचेगी उसकी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अवश्य की जाएगी।
सरकार ने दलहनों में आत्मनिर्भरता का मिशन लांच किया है और इसके सहारे उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। यह एक अच्छी पहल है और इससे दलहनों की पैदावार बढ़ाने में काफी सहायता मिल सकती है।
लेकिन भारत में दलहनों की फसल को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे प्रमुख बाधा मौसम से सम्बन्धित है दलहन फसलों की अधिकांश खेती वर्षा आश्रित क्षेत्रों में होती है इलसिए वहां मानसून की बारिश का सीधा असर पड़ता है।
सरकार ने 2024-25 के पूरे सीजन में 256 लाख टन से कुछ अधिक दलहनों के उत्पादन का आंकड़ा दिया है जिसका मतलब यह हुआ कि अगले पांच वर्षों के दौरान उत्पादन में करीब 100 लाख (एक करोड़) टन का इजाफा करना पड़ेगा तभी 350 लाख टन का लक्ष्य प्राप्त हो सकेगा।
यह काफी चुनौतीपूर्ण कार्य है और इसके लिए सभी पक्षों को मिलकर भगीरथ प्रयास करना होगा। दुनिया में करीब 27 प्रतिशत दलहन का उत्पादन भारत में होता है जबकि फिर भी यहां 50 से 70 लाख टन के बीच दलहन का आयात किया जाता है जो कुल घरेलू उत्पादन के 20 प्रतिशत से भी ज्यादा है।
