दलहनों पर कम से कम 30 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाने की मांग

26-Nov-2025 10:41 AM

कानपुर। स्वदेशी उद्योग- व्यापार क्षेत्र ने केन्द्र सरकार से दलहनों के शुल्क मुक्त आयात की नीति को वापस लेने तथा इस पर कम से कम 30 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाने का आग्रह किया ताकि घरेलू दलहन उत्पादकों को लाभप्रद मूल्य सुनिश्चित करते हुए इसकी पैदावार और बिजाई बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। 

भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्य्क्ष एवं महामंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के सीमावर्ती बुंदेलखंड संभाग के व्यापारियों ने प्रधानमंत्री को भेजे एक ज्ञापन में कहा है कि विदेशों से सस्ते दलहनों का विशाल आयात होने से घरेलू बाजार भाव घटकर काफी नीचे आ गया है जिससे भारतीय किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है।

नौलखा गल्ला मंडी के व्यापारियों, आढ़तियों एवं दाल मिलर्स के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर इस मांग के समर्थन में विभिन्न मंडियों में अभियान चलाया जाएगा और सरकार से दलहनों पर आयात शुल्क बढ़ाने के लिए दबाव डालने का प्रयास किया जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि तुवर एवं उड़द के आयात को 31 मार्च 2026 तक के लिए शुल्क मुक्त कर दिया गया है जबकि मसूर एवं देसी चना पर 10-10 प्रतिशत का मामूली सीमा शुल्क लागू है।

हाल ही में पीली मटर पर 30 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया गया है और मूंग के आयात पर वर्ष 2022 से ही प्रतिबंध लगा हुआ है। 

उद्यमियों- व्यापारियों का कहना है कि कमजोर घरेलू बाजार भाव के कारण भातीय दलहन उत्पादक हतोत्साहित हो रहे हैं और इसलिए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक,

तेलंगाना, गुजरात तथा राजस्थान जैसे राज्यों में दलहनों का बिजाई क्षेत्र बढ़ नहीं रहा है। दलहनों में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार ने मिशन तो लांच किया है मगर इसके आयात की उदार नीति को भी बरकरार रखा है।