उत्तर प्रदेश रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन की 61 वीं वार्षिक आम बैठक दिए गए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव

30-Sep-2024 09:26 AM

लखनऊ (भारती एग्री एप्प)। उत्तर प्रदेश (यूपी) रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन की 61 वीं वार्षिक आम सभा का आयोजन लखनऊ के होटल ताज में सफलतापूर्वक हुआ जिसे सम्बोधित करते हुए यूपी रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के पुनः निर्वाचित अध्यक्ष धर्मेन्द्र जैन ने अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस वार्षिक बैठक में उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री, प्रमुख सचिव, आल इंडिया रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन के अध्यश नवनीत चितलांगिया तथा एसोसिएशन के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे। 

धर्मेन्द्र जैन ने उत्तर प्रदेश में इंटरनेशनल मिलिंग स्कूल की स्थापना के लिए भूमि आवंटित करने के लिए राज्य सरकार की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान "उत्कृष्टता का केन्द्र" (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) बनेगा तथा मिलर्स को मिला एवं प्रशिक्षण देने के मामले में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने मिलिंग सेक्टर को भरपूर सहयोग-समर्थन देने के लिए यूपी के मुख्यमंत्री का भी आभार व्यक्त किया।

इसके साथ भी नवनीत चितलांगिया ने अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया जिसमें चोकर (व्हीट ब्रान) पर जीएसटी की स्पष्स्टा, लीगल मैट्रोलोजी एक्ट में प्रस्तावित संशोधन, फ्लोर मिल मशीनरी पर जीएसटी में कटौती, चोकर के लिए निर्यात परमिट देना, खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) नीति पर स्पष्टता, पीएलआई योजना में फ्लोर मिलिंग उद्योग को शामिल करना तथा भंडारण क्षमता में बढ़ोत्तरी के लिए सहयोग समर्थन देना आदि सम्मिलित हैं।

उल्लेखनीय है कि यूपी रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मेन्द्र जैन को हाल ही में रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुना गया है जबकि नवनीत चितलांगिया इसके अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं।

यूपी रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष दीपक बजाज ने कहा कि अधिकतर मिलें MSMe के अन्दर आती है, सरकार को MSMe पर देना होगा ध्यान। लीज़ होल्ड को फ्री होल्ड करने के नियमों को बदलना होगा क्योंकि यह नियम बहुत पुराने हैं। मैट्रोलोजी नियम के तहत 25-30 किलो से ज्यादा के पैकिंग पर GST लगाना ठीक नहीं। मिलिंग मशीनरी पर 18% GST लगती है जिसे घटाकर 5% करना होगा।

मनोज सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य परन्तु प्रोसेसिंग मामले में छठे स्थान पर। उत्तर प्रदेश की 86% फसल सिंचाई के माध्यम से की जाती है। खरीफ सीजन में 380 लाख टन उत्पादन में से गेहूं की मात्रा 100 लाख टन उत्तर प्रदेश कर देता है। पूरे प्रदेश में रबी व खरीफ सीजन को मिलाकर 600 लाख टन योगदान रहता है। पिछले 3-4 महीने से गेहूं की सरकारी खरीद में गिरावट देखी गयी।

इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ विभिन्न राज्यों से 300 से अधिक गेहूं जगत से जुड़े उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया।