उड़द का क्षेत्रफल मध्य प्रदेश में घटा - कर्नाटक और महाराष्ट्र में बाढ़ वर्षा से फसल क्षतिग्रस्त
03-Oct-2024 04:15 PM
नई दिल्ली । दक्षिण-पश्चिम मानसून की भारी वर्षा होने तथा कुछ इलाकों में बाढ़ एवं जल जमाव का संकट बढ़ने से उड़द की फसल क्षतिग्रस्त हो गई। कर्नाटक के यदगीर, कलबुर्गी, बीदर तथा विजयपुरा जिलों में फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है।
इसी तरह महराष्ट्र के कुछ भागों में भी फसल को क्षति पहुंचने की सूचना मिल रही है। गुजरात तथा मध्य प्रदेश में कुछ क्षेत्रों में फसल की हालत अच्छी नहीं है। श्रमिकों के अभाव की वजह से नई फसल की कटाई-तैयारी में बाधा पड़ रही है।
देश के सबसे प्रमुख उड़द उत्पादक राज्य- मध्य प्रदेश में चालू खरीफ सीजन के दौरान इस महत्वपूर्ण दलहन फसल के बिजाई क्षेत्र में काफी गिरावट आई है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर उड़द का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 32.60 लाख हेक्टेयर से घटकर इस वर्ष 30.73 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया।
इसके तहत उड़द का क्षेत्रफल मध्य प्रदेश में 13.90 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 9.79 लाख हेक्टेयर तथा राजस्थान में 3.18 लाख हेक्टेयर से गिरकर 2.98 लाख हेक्टेयर रह गया।
दूसरी ओर इसका रकबा झारखंड में 1.02 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.24 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जबकि छत्तीसगढ़ में 1.37 लाख हेक्टेयर एवं गुजरात में 83 हजार हेक्टेयर दर्ज किया गया जो गत वर्ष से कुछ ज्यादा रहा।
एक दाल मिलर का कहना है कि अत्यधिक वर्षा एवं जल जमाव के कारण मध्य प्रदेश के कुछ भागों एवं गुजरात में फसल को भारी क्षति होने के संकेत मिल रहे हैं जिससे राष्ट्रीय स्तर पर उड़द के उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है
जबकि एक अन्य विश्लेषक ने 30-40 प्रतिशत फसल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका जाहिर की है। इस वर्ष देश के सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में उड़द की फसल के लिए भारी वर्षा घातक साबित हो रही है।
उत्तर प्रदेश में उड़द की फसल को बुंदेलखंड संभाग में ज्यादा नुकसान हुआ है जबकि अन्य क्षेत्रों में सीमित क्षति हुई है। वर्षा की वजह से उड़द के दाने में नमी का अंश काफी ऊंचा हो गया है मगर अब मौसम साफ होने पर स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है।
आई ग्रेन इंडिया डायरेक्टर राहुल चौहान का कहना है कि मानसून की विदाई शुरू हो गई है और उत्पादक क्षेत्रों में अच्छी धूप निकलने से फसल को राहत मिलेगी। उड़द के दाम में नरमी आने का एक बड़ा कारण इसके आयात में बढ़ोत्तरी होना है।
एक समीक्षक के मुताबिक आमतौर पर दीपावली के बाद उड़द की मांग कमजोर पड़ जाती है इसलिए इसके बाजार भाव में सीमित तेजी रह सकती है। घरेलू उत्पादन में गिरावट आने से बाजार को कुछ समर्थन मिलने की उम्मीद है।
