ऊंची उपज दर के सहारे कपास के उत्पादन में कम गिरावट आने की संभावना
08-Oct-2024 12:05 PM
मुंबई। हालांकि पिछले साल के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान राष्ट्रिय स्तर पर कपास का बिजाई क्षेत्र 123.71 लाख हेक्टेयर से करीब 9 प्रतिशत या 11 लाख हेक्टेयर घटकर 112.76 लाख हेक्टेयर पर अटक गया और कुछ इलाको में भारी वर्षा एवं भयंकर बाढ़ से भी फसल को नुकसान हुआ जिससे रुई के कुल उत्पादन में काफी गिरावट आने की आशंका व्यक्त की जा रही थी लेकिन कुछ समीक्षकों का मानना है कि कपास की बची हुई फसल की हालत काफी अच्छी है और इसकी उपज दर ऊंची देखि जा रही है जिससे रुई का कुल उत्पादन पिछले सीजन के आस-पास पहुंच सकता है। इस बार कपास की फसल पर कीड़ो-रोगो का काफी कम प्रकोप रहा और सही समय पर अच्छी बारिश हुई।
नागपुर स्थित केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान के डायरेक्टर का कहना है कि कुल मिलाकर फसल की स्थिति गत वर्ष से बेहतर है और लगातार सुधरती भी जा रही है। इसकी उपज दर ऊंची रहने की उम्मीद है जिससे रुई का कुल उत्पादन पिछले साल के बराबर हो सकता है केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार 2023-24 सीजन के दौरान देश में 325.22 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) पिंक बॉलवर्म किट से ज्यादा खतरा नहीं हुआ और चूसक कीड़ो का भी प्रकोप काफी कम देखा जा रहा है। ज्यादा बारिश होने से कीड़ो-रोगो को फ़ैलने का अवसर नहीं मिल सका। उत्तरी राज्यों में इसका थोड़ा, बहुत प्रकोप देखा गया मगर मध्यवर्ती एवं दक्षिणी प्रांतो में इसका प्रकोप अभी तक सामने नहीं आया है।
उत्तरी राज्यों की मंडियों में रुई की आवक बढ़ती जा रही है और कीड़ो रोगो का सीमित प्रकोप होने से इसकी क्वालिटी बेहतर दिखाई पड़ रही है देश के अन्य राज्यों में भी फसल की हालत काफी अच्छी है। कुछ इलाको में नए माल की आपूर्ति हो रही है और आगे इसकी रफ्तार अनवरत बढ़ती जाएगी। एक समीक्षक ने तो 361 लाख गांठ कपास के उत्पादन का अनुमान लगाया है।
