विभिन्न मंडी में एमएसपी पर कपास की भारी खरीद जारी

17-Nov-2025 09:35 PM

हैदराबाद। हालांकि बिजाई क्षेत्र में कमी आने तथा प्राकृतिक आपदाओं से फसल को नुकसान होने के कारण इस बार कपास के घरेलू उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है लेकिन कुछ कारणों से इसका थोक मंडी भाव सरकारी समर्थन मूल्य से नीचे चल रहा है।

उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने 2024-25 के मुकाबले 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 589 रुपए बढ़ाकर मीडियम रेशेवाली श्रेणी के लिए 7710 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशेवाली किस्मों के लिए 8110 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जबकि थोक मंडी भाव उससे काफी नीचे चल रहा है। 

सरकार ने रूई के आयात पर लागू 11 प्रतिशत के सीमा शुल्क को पहले ही हटा दिया है अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रूई का भाव नीचे चल रहा है। इसके फलस्वरूप भारत में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील एवं अमरीका सहित कुछ अन्य देशों से रूई का विशाल आयात हो रहा है।

एक अग्रणी उद्योग संगठन कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार 2024-25 के मार्केटिंग सीजन के दौरान भारत में करीब 41 लाख गांठ रूई का भारी आयात हुआ जो 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में 4 लाख गांठ का 10 प्रतिशत बढ़कर 45 लाख गांठ पर पहुंच जाने का अनुमान है। इससे घरेलू कपास की खरीद में भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की दिलचस्पी कम हो गई है।   

अक्टूबर की वर्षा से कुछ  राज्यों में न केवल कपास की फसल को क्षति हुई बल्कि रूई के गोले (बॉल) में नमी का अंश भी बढ़ गया।

इसके अलावा मोंथा नामक समुद्री च्रकवती तूफान के प्रकोप से तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश में कपास की फसल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गई। 

अब मौसम साफ हो गया है और इसलिए सरकारी क्रय केन्द्रों पर सामान्य औसत क्वालिटी वाली कपास की अच्छी आवक होने लगी है।

सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास खरीदने के लिए अच्छी व्यवस्था की गई है।