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24-Sep-2026 01:51 PM
नई दिल्ली। काला सागर का जल मार्ग असुरक्षित होने से रूस तथा यूक्रेन से गेहूं का निर्यात शिपमेंट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है जिससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल तथा कीमत तेज होती जा रही है। इसे देखते हुए बांग्ला देश के आयातकों ने भारत से सस्ते गेहूं की खरीदारी शुरू कर दी है। भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात को पूरी तरह नियंत्रण मुक्त कर दिया है।
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक भारत में गेहूं का पर्याप्त निर्यात योग्य अधिशेष स्टॉक मौजूद है जिससे बांग्ला देश की मांग एवं जरूरत को आसानी से पूरा किया जा सकता है। भारत से बांग्ला देश को गेहूं भेजने में समय एवं परिवहन खर्च भी कम लगेगा। इस गेहूं को सड़क मार्ग, रेल मार्ग एवं जल मार्ग- तीनों रास्तों से भेजा जा सकता है।
जानकार सूत्रों के अनुसार अगस्त के अंतिम दिनों से लेकर अब तक बांग्ला देश के आयातकों द्वारा 2 लाख टन से अधिक भारतीय गेहूं के आयात का अनुबंध किया जा चुका है। वर्ष 2022 के बाद गेहूं की बिक्री का यह पहला महत्वपूर्ण सौदा माना जा रहा है।
रूस एवं यूक्रेन के बीच जारी भयंकर युद्ध के कारण काला सागर क्षेत्र से गेहूं सहित अन्य कृषि उत्पादों का शिपमेंट लगभग ठप्प पड़ गया है। रूस दुनिया में गेहूं का सबसे प्रमुख निर्यातक देश है जबकि यूक्रेन से भी भारी मात्रा में इसका निर्यात किया जाता है। शिपमेंट में रुकावट पैदा होने के कारण एशिया, अफ्रीका एवं यूरोप के आयातक अब वैकल्पिक अपूर्तिकर्ताओं की ओर मुड़ रहे हैं। इसका लाभ भारत को भी हासिल होने की अच्छी उम्मीद है।
बांग्ला देश को प्रति वर्ष 70 लाख टन से अधिक गेहूं के आयात की आवश्यकता पड़ती है। मई 2022 में केन्द्र सरकार द्वारा निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने से पूर्व भारत बांग्ला देश में गेहूं के आयात की लगभग 70 प्रतिशत जरूरतों को पूरा कर रहा था। लेकिन भारत से निर्यात बंद होने के बाद बांग्ला देश ने अर्जेन्टीना, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, रूस एवं यूक्रेन से भारी मात्रा में गेहूं मंगाना शुरू कर दिया। करीब 40 प्रतिशत गेहूं का आयात काला सागर क्षेत्र से होने लगा। इसमें अब बाधा पड़ रही है जिससे भारत को फायदा होने की उम्मीद है।