वैश्विक बाजार भाव ऊंचा होने से 2 वर्ष में खाद्य तेलों का आयात 7 प्रतिशत घटा
26-Nov-2025 06:17 PM
नई दिल्ली। स्वदेशी खाद्य तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण संगठन- इंडियन वनस्पति ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) के अध्यक्ष का कहना है कि निर्यातक देशों में भाव ऊंचा होने से भारत में पिछले दो साल के दौरान खाद्य तेलों के आयात में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट आई है।
खाद्य तेलों का आयात वैश्विक बाजार मूल्य पर काफी हद तक निर्भर करता है जबकि घरेलू मांग एवं जरूरत तथा सीमा शुल्क में कमी वृद्धि भी इसे प्रभावित करती है।
2024-25 के मार्केटिंग सीजन में पाम तेल के आयात में भारी कमी आ गई क्योंकि इसका दाम इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड जैसे शीर्ष निर्यातक देशों में सोया तेल के मुकाबले काफी ऊंचा चल रहा था।
दूसरी ओर इसी अवधि में सोयाबीन तेल का आयात उछलकर 55 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। सूरजमुखी तेल का आयात लगभग सामान्य रहा।
अब पाम तेल के दाम में नरमी आने लगी है क्योंकि प्रमुख निर्यातक देशों में इसका बकाया अधिशेष स्टॉक बढ़कर काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ने लगा है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का मूल्य घटकर सोयाबीन तेल से 100 डॉलर प्रति टन तथा सूरजमुखी तेल से 200 डॉलर प्रति टन नीचे आ गया है जिससे 2025-26 के सीजन में इसका आयात तेजी से बढ़ सकता है। थाईलैंड अब पाम तेल के एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता देश के रूप में उभर रहा है।
सरसों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी करना आवश्यक है क्योंकि इसके तेल की मांग एवं खपत बढ़ती जा रही है। हालांकि पाम तेल के वैश्विक उत्पादन में भी इजाफा हो रहा है मगर सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश- इंडोनेशिया में बायो डीजल के निर्माण में इसकी भारी खपत हो रही है।
वैश्विक स्तर पर जैव ईंधन के उत्पादन में करीब 25-30 प्रतिशत खाद्य तेलों का इस्तेमाल होने लगा है जिससे खाद्य उद्देश्य के लिए इसकी उपलब्धता में कमी आने की आशंका है।
जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में खाद्य तेलों का अच्छा आयात हो सकता है और उसके बाद जब सरसों की जोरदार आपूर्ति होने लगेगी तब आयात की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है।
