वित्त वर्ष 2023-24 में मसालों का हुआ शानदार निर्यात
18-Nov-2024 05:30 PM
कोच्चि । मसाला बोर्ड के आकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2023-24 (अप्रैल-मार्च) के दौरान देश से 36,958.80 करोड़ रुपए मूल्य के 15,39,692 टन मसालों एवं मसाला उत्पादों का निर्यात हुआ।
विदेशी मुद्रा में इसका मूल्य 446.417 करोड़ डॉलर रहा। कुछ मसालों की निर्यात मात्रा एवं निर्यात ऑफर मूल्य में अच्छी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई जिसमें कालीमिर्च, इलायची एवं हल्दी शामिल थी।
लालमिर्च का निर्यात 2022-23 के 1.30 अरब डॉलर से 15 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 1.50 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
चीन और बांग्ला देश में इसकी जोरदार मांग बनी रही। इसके साथ ही मसालों के कुल निर्यात में लालमिर्च की भागीदारी बढ़कर 34 प्रतिशत पर पहुंच गई। अकेला चीन द्वारा 4123 करोड़ रुपए मूल्य की 1.79 लाख टन लालमिर्च का आयात किया गया।
मसाला बोर्ड ने साबुत मसालों एवं मूल्य संवर्धित मसाला उत्पादों का निर्यात बढ़ाने के उद्देश्य से एक ट्रांस्फ़ॉर्मेटिव स्कीम शुरू की है।
इसके अलावा इलायची की उत्पादकता में सुधार लाने तथा फसल तुड़ाई के बाद मसालों की क्वालिटी सुधारने के लिए भी स्कीम लागू की गई है। इससे भारतीय मसाले की मांग अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
विश्व मसाला संगठन (वर्ल्ड स्पाइस ऑर्गेनाइजेशन या डब्ल्यू एस ओ) के चेयरमैन का कहना है कि भारतीय मसालों का निर्यात बढ़कर वर्ष 2030 तक 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है क्योंकि इसकी वार्षिक वृद्धि दर ऊंची चल रही है।
दुनिया के तमाम आयातक देशों में भारतीय मसालों एवं मसाला उत्पादों के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है क्योंकि इसकी क्वालिटी अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और इसका पर्याप्त स्टॉक भी उपलब्ध रहता है।
भारत से निर्यात होने वाले प्रमुख साबुत मसालों में लालमिर्च, जीरा, धनिया, कालीमिर्च, हल्दी, छोटी-बड़ी इलायची, लहसुन तथा जायफल-जावित्री आदि शामिल है।
समझा जाता है कि भारत से दुनिया के 100 से अधिक देशों को 80 से ज्यादा किस्मों के मसालों एवं मसाला उत्पादों का निर्यात किया जाता है और इसकी मात्रा तथा आय निरंतर बढ़ती जा रही है।
