विदेशों से भारी आयात जारी रहने के कारण चना के दाम पर दबाव
19-Feb-2026 04:09 PM
मुम्बई। ऑस्ट्रेलिया एवं तंजानिया सहित कुछ अन्य देशों से चना का आयात निरन्तर जारी है जबकि नई घरेलू फसल की आवक भी कुछ मंडियों में जोर पकड़ चुकी है। विदेशों से आयातित चना ज्यादा महंगा नहीं है।
एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के अनुसार भारतीय बंदरगाहों पर अभी आयातित चना का लगभग 3.50 लाख टन स्टॉक मौजूद है जबकि तीन-चार अन्य जहाजों में लदा चना भी वहां पहुंचने वाला है।
दाल मिलर्स प्रीमियम क्वालिटी के आयातित चने की खरीद को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि उससे दाल की क्वालिटी अच्छी रहती है और उसमें टूट का खतरा कम रहता है। उस आयातित चना का रंग एवं आकार भी भारतीय चने से बेहतर होता है और उसका पर्याप्त स्टॉक भी उपलब्ध है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अखिल भारतीय स्तर पर चना का औसत थोक मंडी भाव 2 फरवरी के 5621.66 रुपए प्रति क्विंटल से गिरकर 9 फरवरी को 5396.47 रुपए प्रति क्विंटल रह गया जो सरकार द्वारा 2025-26 सीजन के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 5875 रुपए प्रति क्विंटल से काफी नीचे है। मंत्रालय के मुताबिक 2024-25 के रबी सीजन में 111.14 लाख टन चना का घरेलू उत्पादन हुआ था।
चना का बिजाई क्षेत्र पिछले साल के 91.22 लाख हेक्टेयर से 5.45 प्रतिशत बढ़कर इस बार 96.20 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जबकि कुल मिलाकर फसल की हालत संतोषजनक बताई जा रही है। इसके फलस्वरूप उत्पादन कुछ बेहतर हो सकता है।
कर्नाटक की मंडियों में नए चने की आवक जोर पकड़ चुकी है। जबकि महाराष्ट्र की मंडियों में भी आपूर्ति बढ़ने लगी है। आगामी सप्ताहों के दौरान मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश एवं गुजरात सहित अन्य उत्पादक राज्यों में भी चना की जोरदार आवक होने लगेगी।
