यूरोपीय संघ के टेक्सटाइल बाजार में भारत और बांग्ला देश के बीच रहेगी प्रतिस्पर्धा
19-Feb-2026 03:52 PM
अहमदाबाद। बदलते समीकरणों के बीच यूरोपीय संघ के वस्त्र-परिधान बाजारों में बांग्ला देश को अब भारत की सख्त चुनौती एवं कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। एक तरफ बांग्ला देश को वह सबसे कम विकसित देश (एलडीसी) के लिए सुविधा एवं शुल्क रियायत का लाभ मिल रहा था वह समाप्त होने वाला है जबकि दूसरी ओर भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता होने से भारतीय निर्यातकों को काफी राहत मिल सकती है।
बांग्ला देश में कपास का नगण्य उत्पादन होता है जबकि कपड़ा उद्योग बहुत विस्तृत है। वहां अभी तक भारत से रूई का सर्वाधिक आयात होता रहा है। आगामी समय में भी वहां यह प्रक्रिया जारी रह सकती है। बांग्ला देश को अमरीका ने यह छूट दी है कि यदि यह उससे रूई मंगाकर उससे वस्त्र उत्पादों का निर्माण करता है तो अमरीकी बाजारों में उसके शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी जाएगी।
लेकिन यूरोपीय संघ ने ऐसी कोई छूट नहीं दी है इसलिए महंगाई अमरीकी रूई के आयात से निर्मित वस्त्र उत्पादों का वहां निर्यात करना आसान नही होगा। इसके बजाए बांग्ला देश को सस्ती भारतीय रूई का आयात करना पड़ेगा।
विभिन्न कारणों से अंतर्राष्ट्रीय वस्त्र उत्पाद निर्यात बाजार में भारत की भागीदारी घटती जा रही थी जबकि बांग्ला देश, वियतनाम एवं चीन सहित अन्य देशों को वहां आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा था। लेकिन अब समीकरण बदल गया है।
भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को इससे अच्छी गति मिल सकती है। भारत से यूरोपीय संघ को कॉटन यार्न एवं फेब्रिक्स का निर्यात निकट भविष्य में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है और बाद में तैयार वस्त्र उत्पादों का निर्यात भी जोर पकड़ सकता है।
