100 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात खोलने पर हो रहा है विचार
26-Nov-2024 06:30 PM
नई दिल्ली । केन्द्र सरकार 100 प्रतिशत टूटे सफेद चावल के निर्यात पर पिछले दो वर्षों से अधिक समय से आगे प्रतिबंध को समाप्त करने पर विचार कर रही है जिससे भारतीय चावल के सकल निर्यात में जबरदस्त इजाफा हो सकता है।
घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति बेहतर होने तथा कीमत लगभग स्थिर रहने से सरकार ने सफेद गैर बासमती चावल के निर्यात को पूरी तरह खोलने का निर्णय लिया और इसके लिए घोषित 490 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) को भी समाप्त कर दिया।
इसी तरह गैर बासमती सेला चावल पर लागू 20 प्रतिशत के निर्यात शुल्क को वापस ले लिया गया। लेकिन 100 प्रतिशत टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध अभी तक हटाया नहीं गया है।
उल्लेखनीय है कि शत-प्रतिशत टूटे चावल (ब्रोकन राइस) के निर्यात को 9 सितम्बर 2022 को मुक्त सूची से हटाकर प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया था और इसके साथ ही भारत से इस चावल का निर्यात पर प्रतिबंध लागू हो गया।
अब चूंकि साबुत श्रेणी के चावल के निर्यात को नियत्रणों-प्रतिबंधों से मुक्त कर दिया है इसलिए उद्योग व्यापार क्षेत्र को भरोसा है कि जल्दी ही टुकड़ी चावल के व्यापारिक निर्यात की अनुमति दी जा सकती है।
उधर सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया सरकार पर राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन के निर्यात पर लगी रोक को वापस लेने के लिए लगातार दबाव डाल रहा है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार अनेक आयातक देशों की मानवीय खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए 100 प्रतिशत टूटे सफेद चावल के निर्यात की अनुमति दिया जाना आवश्यक है।
सरकार से लगातार इसकी मांग की जाती रही है और अब परिस्थितियां भी अनुकूल हो गई है इसलिए सरकार को स्वीकृति देने में कठिनाई नहीं होगी।
समझा जाता है कि केन्द्र सरकार इस बारे में गम्भीरतापूर्वक विचार कर रही है और कभी भी इस पर सकारात्मक निर्णय की घोषणा हो सकती है। भारत में लगभग 150 लाख टन टुकड़ी चावल का उत्पादन होता है।
