2025-26 के लिए अफीम पोस्त की खेती हेतु लाइसेंस की नीति घोषित

13-Sep-2025 10:51 AM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश में अफीम पोस्त की खेती के लिए 2025-26 सीजन के वास्ते वार्षिक लाइसेंस की नीति घोषित कर दी है। इस बार करीब 1.21 लाख किसान इस लाइसेंस को हासिल करने के लिए पात्र माने जा रहे हैं।

यह संख्या गत वर्ष से 23.5 प्रतिशत ज्यादा है। इस बार इन तीनों प्रांतों में 15000 अतिरिक्त किसानों को लाइसेंस दिए जाने की संभावना है। 

केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितम्बर 2026 तक की अवधि के लिए अफीम उत्पादकों को सशर्त लाइसेंस जारी करने की घोषणा करते हुए एक अधिसूचना जारी की गई है। अफीम की खेती मुख्यतः उपरोक्त तीन राज्यों में ही की जाती है। 

सरकार ने ऐसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले उत्पादकों को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव रखा है जिसने गैर लांस्ड पोस्त भूरी की उपज दर 900 किलो प्रति हेक्टेयर या इससे ऊंची हासिल की है।

ऐसे उत्पादकों को अफीम गम की खेती के लिए परम्परागत विधि अपनाने का विकल्प दिया जाएगा। इस परिवर्तन का उद्देश्य किसानों को अपने खेतों में अफीम की अधिक ऊंची उपज दर हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके साथ-साथ खेतों से अफीम को कहीं अन्यत्र भेजने का खतरा भी इससे घट जाएगा। 

दूसरी ओर सरकार सीपीएस खेती पद्धति के अंतर्गत 2025-26 के सीजन में किसानों के लिए लाइसेंस स्थगित कर देगी। यह लाइसेंस स्थगन ऐसे किसानों पर लागू होगा जिन्होंने 2024-25 के फसल वर्ष के दौरान 800 किलो प्रति हेक्टेयर की निर्धारित  न्यूनतम पात्रता उपज दर को हासिल नहीं किया।

किसानों को लाइसेंस प्राप्त करने के लिए कुछ अन्य नियमों-शर्तों का पालन करना आवश्यक होगा। राजस्व विभाग की अधिसूचना में इसका स्पष्ट उल्लेख करते हुए विस्तृत विवरण दिया गया है।

पहले आशंका व्यक्त की जा रही थी कि इस बार अफीम के रकबे में कमी आ सकती है लेकिन अब इसकी संभावना क्षीण पड़ गई है। प्रत्येक लाइसेंस युक्त किसानों को अधिकतम 0.05 हेक्टेयर में अफीम की खेती करने की अनुमति दी जाएगी।