आईवीपीए द्वारा सदस्यों को संशोधित जीएसटी के अनुरूप उत्पादों का मूल्य नियत करने का सुझाव

09-Sep-2025 06:14 PM

नई दिल्ली। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण संगठन- इंडियन वैजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) ने अपने सदस्यों को भेजे पत्र में कहा है कि केन्द्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से लीगल मेट्रोलॉजी डिवीजन के मैन्युफैक्चर्स, पैकर्स अथवा आयातकों द्वारा अपने अनबिके स्टॉक पर संशोधित खुदरा बिक्री मूल्य (एमआरपी) की घोषणा से सम्बन्धित है।

9 सितम्बर 2025 की तिथि वाले पत्र में कहा गया है कि लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कॉमोडिटीज) रूल्स, 2011 के नियमों के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए केन्द्र सरकार ने पैकर्स, मैन्युफैक्चर्स एवं आयातकों को जीएसटी में संशोधन से पूर्व अनबिके स्टॉक पर संशोधित एमआरपी घोषित करने की अनुमति प्रदान की है।

यह संशोधित मूल्य जीएसटी में हुए बदलाव के टैक्स में वृद्धि या कटौती के रूप में दिखाई पड़ना चाहिए और यह घोषणा (प्रदर्शन) निम्नलिखित महत्वपूर्ण स्थितियों में स्टाम्पिंग, लेबलिंग तथा ऑनलाइन प्रिंटिंग द्वारा की जा सकती है। 

मूल एमआरपी स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ना चाहिए और इसको काटकर या उसके ऊपर संशोधित मूल्य अंकित नहीं होना चाहिए। मूल तथा संशोधित एमआरपी टैक्स में हुई वृद्धि अथवा जीएसटी के अंतर्गत लागू टैक्स (नए कर) की सीमा से बाहर नहीं होना चाहिए।

यदि टैक्स में कमी हुई है तो संशोधित मूल्य घटी हुई टैक्स राशि को प्रदर्शित करता होना चाहिए। कम से कम दो विज्ञापन समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाना चाहिए और डीलर्स के बीच सूचना प्रसारित की जानी चाहिए और कीमतों में बदलाव के बारे में सम्बन्धित अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिए। 

पैकेजिंग मैटीरियल्स अथवा जीएसटी संशोधन से पूर्व निर्मित रैपर्स का उपयोग 31 दिसम्बर 2025 तक अथवा स्टॉक के समाप्त होने तक (जो भी पहले हो) रिपैकेजिंग के लिए किया जा सकता है। लेकिन उस पर एमएसपी में हुआ परिवर्तन स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए।