आधुनिक कृषि तकनीक से पूरे वर्ष मक्का का उत्पादन संभव

08-Sep-2025 06:10 PM

नई दिल्ली। खेतों की नई पद्धति, हाइब्रिड बीज के विकास, उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी तथा किसानों के बढ़ते उत्साह की बदौलत अब पूरे देश में मक्का की खेती संभव हो सकती है।

खरीफ और रबी सीजन में इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज का उत्पादन पहले से ही हो रहा है जबकि अब ग्रीष्मकाल या जायद सीजन में भी इसकी खेती बड़े पैमाने पर शुरू करने का प्लान बनाया जा रहा है। इससे न केवल घरेलू प्रभाग में मक्का की तेजी से बढ़ती मांग एवं खपत को पूरा करने में आसानी होगी बल्कि किसानों की आमदनी में भी अच्छा इजाफा होगा। 

एथनॉल निर्माण उद्योग में मक्का का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है जबकि आने वाले वर्षों में वहां इसकी मांग तथा खपत में और भी तेजी से बढ़ोत्तरी होने की संभावना है।

इसके अलावा पशु आहार, पॉल्ट्री फीड तथा स्टार्च निर्माण उद्योग में भी मक्का का उपयोग बढ़ रहा है। इससे कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बना रहता है और किसानों को आकर्षक आमदनी प्राप्त होती है। इससे मक्का की खेती में उसकी दिलचस्पी बढ़ रही है। 

केन्द्र सरकार ने मक्का का घरेलू उत्पादन 2047 तक बढ़ाकर 860 लाख टन पर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है क्योंकि तभी खाद्य उद्देश्य, पशु आहार निर्माण तथा औद्योगिक उपयोग के लिए इसकी बढ़ती मांग को पूरा करना संभव हो सकेगा।

यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य वर्तमान समय के वार्षिक उत्पादन की तुलना में करीब दोगुना ज्यादा है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में 423 लाख टन मक्का के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान लगाया है। 

उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार 860 लाख टन के उत्पादन का लक्ष्य काफी बड़ा और महत्वाकांक्षी है मगर इसे हासिल किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए देश में मक्का की प्रति औसत उपज दर में भारी बढ़ोत्तरी करना आवश्यक होगा।

हालांकि कुछ राज्यों में इस तरफ विशेष ध्यान दिया जा रहा है और वहां उपज दर में अच्छी बढ़ोत्तरी भी हुई है लेकिन फिर भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादकता दर अभी वैश्विक स्तर से काफी नीचे है। 

भारत में परम्परागत रूप से मक्का की खेती खरीफ सीजन में होती रही है लेकिन बाढ़ में बिहार सहित कुछ अन्य राज्यों में रबी सीजन के दौरान बड़े पैमाने पर इसकी बिजाई होने लगी। इससे इसके कुल घरेलू उत्पादन में इजाफा होने लगा।

खरीफ सीजन में जलवायु परिवर्तन के कारण मक्का की फसल पर खतरा बना रहता है इसलिए इसकी खेती पूरे वर्ष तक जारी रखने की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है। आगे इस मिशन पर जोरदार ढंग से काम होने की उम्मीद है।