आंध्र प्रदेश में लालमिर्च की सरकारी खरीद का प्लान स्थगित रखने का आग्रह
06-Mar-2025 10:41 AM
हैदराबाद। आंध्र प्रदेश में लालमिर्च की खरीद के लिए सरकार की बाजार हस्तक्षेप योजना के दिलचस्प मोड़ का मामला सामने आ रहा है।
कीमतों में जब गिरावट का दौर चल रहा था तब उत्पादक राज्य सरकार से इसकी खरीद शुरू करने की मांग कर रहे थे और अब सरकार उसके लिए तैयार हुई तब किसान इस योजना को कुछ समय तक स्थगित रखने का आग्रह करने लगे।
दरअसल सरकारी हस्तक्षेप योजना लागू होने से पूर्व ही प्रमुख मंडियों में लालमिर्च का भाव तेज होने लगा। उत्पादकों को आशंका है कि यदि निश्चित मूल्य पर सरकारी खरीद आरंभ हुई तो कीमतों में तेजी पर विराम लग जाएगा।
इसे देखते हुए उत्पादक अब सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि पहले बाजार को ऊंचे स्तर पर स्थिर होने दिया जाए और उसके बाद ही इसकी खरीद की योजना लागू की जाए।
लालमिर्च भारत से सर्वाधिक निर्यात होने वाली मसाला फसल है और देश में इसका करीब 75 प्रतिशत उत्पादन तीन प्रांतों- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं कर्नाटक में होता है।
किसानों को लगता है कि यदि इस समय सरकारी खरीद शुरू हुई तो इस महत्वपूर्ण मसाले की कीमतों में आगे और तेजी नहीं आ पाएगी।
ज्ञात हो कि आंध्र प्रदेश लालमिर्च का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य के गुंटूर, प्रकाशम, कुर्नूल तथा कृष्ण जैसे जिलों में विभिन्न किस्मों की लालमिर्च का उत्पादन होता है जिसमें तेजा, ब्यादगी, डीडी बेस्ट, 341 नंबर, 273 नंबर एवं 334 नंबर मुख्य रूप से शामिल है।
घरेलू एवं वैश्विक बाजार में इन किस्मों की लालमिर्च की जबरदस्त मांग रहती है। गुंटूर को एशिया में लालमिर्च का सबसे बड़ा बाजार (उत्पादक मंडी) माना जाता है जो घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस महत्वपूर्ण मसाले की कीमतों का रुख निर्धारित करता है।
वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान भारत में मसालों के कुल निर्यात में लालमिर्च का योगदान 39 प्रतिशत पर पहुंच गया था। भारत दुनिया में लालमिर्च का सबसे प्रमुख उत्पादक, खपतकर्ता एवं निर्यातक देश बना हुआ है। भारत में सर्वोत्तम क्वालिटी की लालमिर्च का उत्पादन होता है।
आंध्र प्रदेश में पिछले साल लालमिर्च का भाव उछलते हुए 28,000 रुपए प्रति क्विंटल के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था जो चालू सीजन में घटकर आधा से भी कम रह गया।
राज्य सरकार ने केन्द्र से पिछले महीने लालमिर्च की खरीद के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना शुरू करने का आग्रह किया और 22 फरवरी को केन्द्र सरकार ने इसे स्वीकार करते हुए 11,781 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 25 प्रतिशत लालमिर्च की खरीद की स्वीकृति प्रदान कर दी। लेकिन अब योजना को स्थगित रखने की मांग हो रही है।
