आंध्र प्रदेश में दलहनों के वार्षिक उत्पादन की विकास दर ऋणात्मक
18-Sep-2025 08:55 PM
विजयवाड़ा। दक्षिण भारत के एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्य- आंध्र प्रदेश में पिछले दो दशकों से दलहनों के उत्पादन में गिरावट का रुख देखा जा रहा है।
नीति आयोग की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार 1950 के दशक से लेकर 2004-05 के सीजन तक राज्य में दलहनों के उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत दर्ज की गई मगर उसके बाद से इसमें गिरावट आने लगी और अब यह 1.97 प्रतिशत ऋणात्मक हो गई है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013-14 तक तेलंगाना भी आंध्र प्रदेश का ही हिस्सा था जहां दलहनों की अच्छी खेती होती है।
पिछले दो दशकों के दौरान आंध्र प्रदेश में दलहन के बिजाई क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आया है और इसमें निरन्तर गिरावट की प्रवृत्ति देखी गई। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक अब आंध्र प्रदेश में करीब 12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहनों की खेती होती है जिसमें खरीफ और रबी-दोनों सीजन की बिजाई शामिल है।
वहां दलहनों का वार्षिक उत्पादन औसत 10.30 लाख टन के करीब होता है और वह देश में दलहनों के उत्पादन के मामले में सातवें नंबर बन गया है। आंध्र में इकलौता ऐसा प्रमुख दलहन उत्पादक राज्य है जहाँ वर्ष 2004-05 के बाद इसकी विकास दर ऋणात्मक देखी जा रही है।
दूसरी ओर अन्य प्रमुख दलहन उत्पादक प्रांतों में विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उदाहरणस्वरूप राजस्थान में 2004-05 के बाद दलहनों के उत्पादन में 8.05 प्रतिशत की दर से इजाफा हुआ है।
इसी तरह दलहनों की विकास दर में महाराष्ट्र में 4.61 प्रतिस्थ तथा मध्य प्रदेश में 4.27 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई जो राष्ट्रीय स्तर की औसत वृद्धि 4.2 प्रतिशत से अधिक रही।
इसके अलावा दलहनों के उत्पादन की विकास दर कर्नाटक में 2.08 प्रतिशत से बढ़कर 2.88 प्रतिशत पर पहुंच गई। गुजरात में भी विकास दर 3.15 प्रतिशत से सुधरकर 3.48 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में (-) 0.34 प्रतिशत से बढ़कर 1.22 प्रतिशत हो गई।
