आयात पर निर्भरता घटाने हेतु दलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की जरूरत पर जोर

03-Mar-2025 05:10 PM

नई दिल्ली। भारत दुनिया में दलहनों का सबसे बड़ा उत्पादक एवं खपतकर्ता के साथ-साथ सबसे प्रमुख आयातक देश भी बना हुआ है। पिछले दो साल से यहां विशाल मात्रा में दलहनों का आयात हो रहा है।

वर्ष 2024 में तो इसका आयात तेजी से बढ़कर 67 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा तुवर, उड़द, देसी चना एवं मसूर का आयात अभी जारी है। पिछले साल अकेले पीली मटर का आयात 30 टन से ऊपर पहुंच गया। 

दलहनों के बढ़ते आयात और इस पर खर्च होने वाली भारी-भरकम बहुमूल्य विदेशी मुद्रा को गंभीरता से लेते हुए स्वयं प्रधानमंत्री ने सभी सम्बन्ध पक्षों से दलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने में सहयोग देने की अपील की है और बजट

प्रस्तावों को ज्यादा प्रभावशाली ढंग से वास्तविक धरातल पर क्रियान्वित करने हेतु उपायों के सुझाव उनसे आमंत्रित किए हैं ताकि विदेशी दलहनों के आयात पर बढ़ती निर्भरता को घटाने और स्वदेशी स्रोतों से आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने में सहायता मिल सके। 

प्रधानमंत्री ने प्राइवेट सेक्टर को बेहतरीन क्वालिटी एवं ऊंची उपज दर वाले दलहन बीज के विकास पर ज्यादा ध्यान देने के लिए कहा है।

इसी तरह फसल विविधिकरण के तहत न्यूट्रिशनल खाद्य उत्पादों और खासकर दलहनों की खेती को बढ़ावा देने के लिए नए उपायों की तलाश और उसका उपयोग करने की आवश्यकता में बढ़ोत्तरी हुई है और चना तथा मूंग के उत्पादन में देश लगभग आत्मनिर्भर हो चुका है

लेकिन अन्य दलहनों की पैदावार घरेलू मांग एवं खपत से कम हो रही है। इसके फलस्वरूप 20 प्रतिशत घरेलू खपत को पूरा करने लायक दलहनों का बाहर से आयात करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए देश में अरहर (तुवर), उड़द तथा मसूर का उत्पादन बढ़ाने की सख्त जरूरत है। 

'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में सरकार का संकल्प बिल्कुल स्पष्ट है। एक ऐसे भारत का निर्माण किया जा रहा है जहां किसानों को सशक्त और समृद्ध होने का अवसर मिल सके।

प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र को राष्ट्रीय विकास का पहला इंजन बताते हुए कहा कि किसान हमारे गौरव हैं। उनका कहना था कि सरकार के तीसरे कार्यकाल के प्रथम पूर्ण बजट में दलहनों का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने का प्रावधान है जिस पर गंभीरता से अमल करने की जरूरत है।