आयात सीमित होने पर मजबूत रह सकता है कालीमिर्च का भाव

04-Jul-2025 04:45 PM

कोच्चि। केरल में कालीमिर्च फसल की तुड़ाई-तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है मगर कर्नाटक में अभी इसकी प्रक्रिया जारी है। मई-जून के दौरान केरल में अच्छी बारिश हुई जो कालीमिर्च की अगली फसल के लिए लाभदायक साबित होने की उम्मीद है।

कर्नाटक में कम वर्षा हुई है इसलिए नए माल की तुड़ाई में ज्यादा बाधा नहीं पड़ रही है। लेकिन देश के अन्य खपतकर्ता प्रांतों में मूसलाधार बारिश होने तथा कुछ इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ने से यातायात प्रभावित होने की आशंका है।

हालांकि अधिकांश खपत केन्द्रों में अभी कालीमिर्च का स्टॉक सामान्य बताया जा रहा है मगर जुलाई-अगस्त में जोरदार बारिश होने से उत्पादक क्षेत्रों से नए माल की आवक प्रभावित होने पर स्टॉक निरन्तर कम होता जाएगा। 

श्रीलंका में कालीमिर्च के नए माल की आवक शुरू होने से भारत में इसका आयात तेजी से बढ़ने की आशंका है। द्विपक्षीय मुक्त व्यापार संधि के तहत श्रीलंका से 2500 टन तक कालीमिर्च का शुल्क मुक्त आयात हो सकता है और उसके बाद भी आयात पर महज 8 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगेगा।

श्रीलंका के रास्ते वियतनामी कालीमिर्च भी भारत में प्रवेश करती है। पहले नेपाल, भूटान, म्यांमार एवं बांग्ला देश के जरिए भारत में वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड एवं ब्राजील जैसे देशों की कालीमिर्च तस्करी के माध्यम से पहुंचती थी मगर अब सीमा पर चौकसी बढ़ने के कारण तस्करी का रास्ता लगभग बंद हो गया है।

कालीमिर्च की आपूर्ति का ऑफ सीजन शुरू होने वाला है और आगे त्यौहारी सीजन में इसकी घरेलू मांग एवं खपत बढ़ने की संभावना है। 2024-25 के सीजन में उत्पादन कम हुआ जबकि देश से निर्यात बढ़ गया।

मसाला तेल एवं ओलियोरेसिन निर्माताओं ने अगर कालीमिर्च की खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखाई और विदेशों से सीमित आयात हुआ तो कीमतों में कुछ तेजी आ सकती है।

कालीमिर्च का निर्यात वित्त वर्ष 2023-24 के 17,890 टन से बढ़कर 2024-25 में 20,830 टन पर पहुंच गया जिसमें  कुल पुनर्निर्यात का माल भी शामिल बताया जा रहा है। कालीमिर्च की निर्यात आमदनी भी इस अवधि में 736.48 करोड़ रुपए से उछलकर 1055 करोड़ रुपए पर पहुंच गई।