अफीम की खेती हेतु किसानों को लाइसेंस जारी करने की शर्तें निर्धारित
12-Sep-2025 05:29 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने 2025-26 के फसल वर्ष (अक्टूबर-सितम्बर) में पोला भूसी (स्ट्रा) के उत्पादन हेतु अफ्रीम पोस्त की खेती के लिए लाइसेंस जारी करने के वास्ते किसानों-उत्पादकों की पात्रता सम्बन्धी शर्तें निर्धारित कर दी हैं।
लाइसेंस के बगैर अफीम की खेती गैर क़ानूनी मानी जाती है और किसानों को एक निश्चित क्षेत्रफल में ही इसकी खेती की अनुमति दी जाती है। इससे ज्यादा क्षेत्र में खेती करना कानूनन अपराध माना जाता है।
राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा चिन्हित अथवा अधिसूचित जमीन में ही पोस्त की खेती हो सकती है। किसानों को सरकारी क्रय केन्द्र पर 800 किलो प्रति हेक्टेयर की औसत उपज दर के आधार पर माल जमा करवाना अनिवार्य है।
यदि इस शर्त का पालन नहीं करने की वजह से किसानों को अफीम की खेती से प्रतिबंधित कर दिया गया है तो उसे 2025-26 सीजन के लिए नियत के आधार पर दोबारा लाइसेंस जारी किया जा सकता है। अफीम की खेती हेतु किसानों को लाइसेंस जारी करने के लिए कुछ अन्य नियमों-शर्तों का निर्धारण किया गया है।
सभी पात्र किसानों को 0.05 हेक्टेयर में खेती के लिए लाइसेंस दिया जाएगा और वे केवल एक ही भूखंड पर इसकी खेती कर सकेंगे। यह भूखंड एक से अधिक राजस्व खसरा नंबरों वाला हो सकता है। मगर कुछ भूखंड का आकार 0.05 हेक्टेयर से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
अफीम उत्पादकों को आमतौर पर पांच वर्ष की अवधि के लिए लाइसेंस दिया जाता है। इस तरह जिन किसानों को 2025-26 सीजन के लिए लाइसेंस दिया गया है वह 2029-30 के सीजन तक प्रभावी रहेगा बशर्तें किसी कारणवश उसे बीच में ही निलंबित न कर दिया जाए।
इन कारणों में किसानों द्वारा अवैध क्रियाकलापों में शामिल होना, एनडीपीएस एक्ट के तहत उसे भारतीय पत्र दिया जाना, विभागीय दिशा निर्देशों का उल्लंघन करना आदि शामिल है। किसान अपनी मर्जी से भी लाइसेंस वापस कर सकते हैं।
राजस्व विभाग की अधिसूचना में आगाह किया गया है कि यदि सरकार आवश्यक निर्णय लेती है तो 2025-26 के दौरान अफीम भूसी में दी गई मार्फिन की मात्रा को भुगतान का आधार माना जा सकता है। जो किसान पिछले तीन साल से अफीम की खेती नहीं कर रहे हैं वे अब लाइसेंस के योग्य नहीं होंगे।
