अगले मार्केटिंग सीजन में चीनी उत्पादक कंपनियों का राजस्व बढ़ने के आसार

18-Jul-2025 03:32 PM

मुम्बई। एक अग्रणी रेटिंग एजेंसी ने गत वर्ष 2025-26 के दौरान चीनी उत्पादक कंपनियों के राजस्व में 6 से 8 प्रतिशत तक का इजाफा होने का अनुमान लगाया है लेकिन एथनॉल के दाम में स्थिरता के कारण कंपनियों का लाभांश (मार्जिन) सीमित रह सकता है।

रेटिंग एजेंसी के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा सामान्य औसत से अधिक होने तथा महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में गन्ना का बिजाई क्षेत्र बढ़ने की संभावना से 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में चीनी का घरेलू उत्पादन 2024-25 सीजन के मुकाबले 15 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। 

2025-26 सीजन के दौरान चीनी की बिक्री की मात्रा बढ़ने की संभावना है और इसके बावजूद कीमत काफी हद तक मजबूत बनी रह सकती है। इसके साथ डिस्टीलरीज में एथनॉल का उत्पादन भी सुधरेगा। इससे चीनी मिलों की कुल आमदनी में स्वाभाविक रूप से अच्छी बढ़ोत्तरी हो सकती है।

लेकिन यदि एथनॉल के मूल्य में स्थिरता बरकरार रही तो चीनी मिलों के संचालनीय लाभांश में सीमित वृद्धि ही संभव हो सकेगी। चीनी क्षेत्र के लिए रेटिंग एजेंसी का आगामी परिदृश्य पूर्व स्तर पर ही स्थिर है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

रेटिंग एजेंसी ने चीनी का सकल उत्पादन 2024-25 सीजन के 296 लाख टन से बढ़कर 2025-26 के सीजन में 340 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान लगाया है। यदि इसमें से 40 लाख टन चीनी का उपयोग एथनॉल निर्माण में किया गया तो भी खाद्य उद्देश्य के लिए 300 लाख टन का स्टॉक उपलब्ध रह सकता है जो 2024-25 सीजन के स्टॉक 262 लाख टन से 38 लाख टन ज्यादा होगा।

दूसरी ओर चीनी की घरेलू मांग 290 लाख टन के आसपास रह सकती है। चीनी का घरेलू बाजार भाव फिलहाल 3900-4100 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है और अगले सीजन की शुरुआत तक यह मजबूत बना रह सकता है। 

रेटिंग एजेंसी के अनुसार चालू मार्केटिंग सीजन के अंत में यानी 30 सितम्बर 2025 को भारतीय उद्योग के पास करीब 52 लाख टन चीनी का बकाया अधिशेष स्टॉक मौजूद रहेगा जो 30 सितम्बर 2024 को   

उपलब्ध लगभग 80 लाख टन के स्टॉक से काफी कम है। इस बार का स्टॉक दो माह की खपत के समतुल्य है। अगले मार्केटिंग सीजन की समाप्ति के समय बकाया अधिशेष स्टॉक सुधरकर 63 लाख टन पर पहुंचने की उम्मीद है जो ढाई माह की मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा।