एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने हेतु चीनी के निर्यात को रोकना जरुरी
06-Apr-2026 07:46 PM
मुम्बई। स्वदेशी एथनॉल उद्योग पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्यांकित स्तर वर्तमान समय के 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने के लिए जोरदार लॉबिंग कर रहा है। इसे देखते हुए एक वैश्विक संस्था का कहना है कि मिश्रण का स्तर 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने के लिए चीनी के निर्यात पर रोक लगाने की आवश्यकता पड़ेगी। इसे घरेलू प्रभाग में चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी और एथनॉल निर्माण के लिए अधिक मात्रा में गन्ना उपलब्ध हो सकेगा।
भारत पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य पहले ही हासिल कर चुका है। उद्योग सरकार से अब इस लक्ष्य को 25-30 प्रतिशत तक बढ़ाने का आग्रह कर रहा है। सरकार फिलहाल असमंजस में है। चीनी का उत्पादन उम्मीद से काफी कम होने की संभावना है
क्योंकि उत्तर प्रदेश में उत्पादन की स्थिति उत्साहवर्धक नहीं है और महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में गन्ना के अभाव में चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं। अगले सीजन के उत्पादन का परिदृश्य अभी अनिश्चित है। यदि एथनॉल निर्माण में गन्ना की अधिक मात्रा के उपयोग की अनुमति दी गई तो खाद्य उद्देश्य के लिए चीनी का अभाव उत्पन्न हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि भारत को 2022-23 के सीजन में चीनी की कमी का सामना करना पड़ा था इसलिए इसके निर्यात को रोक दिया गया और 2023-24 के सीजन में बेहतर उत्पादन के बावजूद निर्यात की अनुमति नहीं दी गई।
2024-25 के सीजन में 10 लाख टन के शिपमेंट की स्वीकृति उद्योग को मिली जिसमें से करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात हो सका। अब 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में 20 लाख टन चीनी के निर्यात शिपमेंट की मंजूरी दी गई है।
