अजवायन उत्पादन- गुजरात अधिक : आंध्र प्रदेश कम

07-Feb-2025 07:07 PM

नई दिल्ली । देश में मुख्यत अजवायन का उत्पादन गजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में होता है। उल्लेखनीय है कि गुजरात में अजवायन की फसल शरदकालीन एवं ग्रीष्मकालीन दो बार आती है जबकि अन्य उत्पादक राज्यों में एक बार शरदकालीन फसल आती है। वर्तमान में सभी उत्पादक केन्द्रों की मंडियों में नए अजवायन की आवक हो रही है।

उत्पादन 

जानकार सूत्रों का कहना है कि इस वर्ष गुजरात में शरदकालीन एवं ग्रीष्मकालीन फसलों का उत्पादन अधिक माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि गत वर्ष गुजरात में शरदकालीन अजवायन का उत्पादन 70/80 हजार बोरी का माना गया था जोकि इस वर्ष बढ़कर लगभग 1 करोड़ बोरी होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। ग्रीष्मकालीन अजवायन की बिजाई अच्छी होने के कारण अप्रैल माह में शुरू होने वाली फसल भी गत वर्ष की तुलना में अधिक होने की संभावना है। बशर्ते आगामी दिनों में मौसम फसल के अनुकूल रहे। गत वर्ष गुजरात में ग्रीष्मकालीन अजवायन की पैदावार 3.5/4 लाख बोरी की मानी गई थी। 

आंध्र प्रदेश में दूसरे वर्ष भी अजवायन की पैदावार कम रहने के समाचार मिल रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में आंध्र में पैदावार 2/2.25 लाख बोरी की रही जोकि वर्ष 2024 में घटकर 1.60/1.70 लाख बोरी की रह गई वर्ष 2024 में उत्पादन 1.40/1.50 लाख बोरी होने के समाचार है। 

मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में भी अजवायन का उत्पादन गत वर्ष के 70/80 हजार बोरी (प्रत्येक बोरी 50 किलो) होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र के नंदूरबार लाइन पर उत्पादन 15/20 हजार बोरी होने के समाचार मिल रहे हैं।  

आवक

वर्तमान में गुजरात की प्रमुख मंडी जामनगर में नए अजवायन की आवक लगभग 2000 बोरी की चल रही है। और भाव क्वालिटीनुसार 120/230 रुपए के बोले जा रहे हैं। मध्य प्रदेश की नीमच मंडी में आवक 600/700 बोरी की हो रही। और क्वालिटीनुसार भाव 110/165 रुपए के बोले जा रहे हैं। आंध्र प्रदेश की करनूल मंडी में आवक 1800/2000 बोरी की हो रही और भाव 120/230 रुपए के चल रहे हैं।  

मंदा-तेजी 

जानकर सूत्रों का कहना है कि हाल-फिलहाल अजवायन की कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है। क्योंकि आगामी दिनों में नए मालों की आवक का दबाव बना रहेगा। साथ ही अप्रैल माह में गुजरात की ग्रीष्मकालीन फसल की आवक शुरू हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर नए मालों की आवक शुरू होने के पश्चात से अब तक कीमतों में क्वालिटीनुसार 15/20 रुपए प्रति किलो की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। अभी बाजार में तेजी के आसार नहीं है। जहां तक मंदे का सवाल है वर्तमान कीमतों में 5/10 रुपए प्रति किलो का मंदा और आ सकता है। तत्पश्चात भाव सीमित दायरे में ही बने रहेंगे। जून-जुलाई के पश्चात भाव तेज रहने के व्यापारिक अनुमान लगाए जा रहे हैं।