अल नीनो की तीव्रता 2023 से ज्यादा रहने की आशंका

27-Apr-2026 05:22 PM

तिरुअनन्तपुरम। पूर्वी विषुवतीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह पर इस बार जिस अल नीनो मौसम चक्र का निर्माण हो रहा है उसकी तीव्रता एवं सघनता वर्ष 2023 से ज्यादा तथा वर्ष 2015 के समकक्ष रहने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इससे भारतीय कृषि क्षेत्र पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

अल नीनो के प्रकोप से मानसून की वर्षा प्रभावित होने की संभावना है जबकि बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर घटकर काफी नीचे आ गया है। ऊंचे तापमान एवं बढ़ती गर्मी से खेतों की मिटटी से नमी का अंश तेजी से गायब होता जा रहा है और उसमें दरारें पड़ने लगी हैं। 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में मानसून की बारिश सामान्य औसत से 6 प्रतिशत कम हुई थी जबकि वर्ष 2015 में वर्षा की कमी 14 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वह पिछले 100 वर्षों में दसवां सबसे सूखा वर्ष माना गया था और उस समय कृषि उत्पादन में भारी गिरावट आ गई थी।

लेकिन यह भी सही है कि सभी अल नीनो वाले वर्षों में मानसून का कमजोर रहना  आवश्यक नहीं है। वर्ष 1997 में काफी तगड़ा अल नीनो आया था मगर फिर भी मानसून की सामान्य बारिश हुई थी। भारत में जून से खरीफ फसलों की बिजाई आरंभ होने वाली है इसलिए सबका ध्यान मानसून पर केन्द्रित है।