अमरीका के साथ द्विपक्षीय करार में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा पर जोर
09-Jun-2025 12:44 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने जोर देकर कहा है कि भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार संधि के लिए जारी वार्ता के क्रम में भारतीय कृषक समुदाय के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। कृषि मंत्री ने भारतीय कृषि क्षेत्र पर इस द्विपक्षीय व्यापार वार्ता तथा आगामी समय में होने वाले कर्रार के संभावित असर का आंकलन करते हुए कहा कि भारतीय किसानों के हितों को दांव पर नहीं लगाया जाएगा। सरकार की पहली प्राथमिकता अपने किसानों के हितों को सुरक्षित रखना है और इस दिशा में आंख बंद करके कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। करार से होने वाले फायदों एवं नुकसान का आंकलन किया जाएगा और उसे ध्यान में रखकर ही समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा।
दरअसल अमरीका अपने कृषि उत्पादों और खासकर मक्का तथा सोयाबीन के लिए भारत में अधिक से अधिक बाजार पहुंच सुनिश्चित करना चाहता है और इसके लिए वह भारी दबाव भी डाल रहा है। वार्ताकारों द्वारा द्विपक्षीय करार के प्रथम चरण का विस्तृत प्रारूप जल्दी ही तैयार करने तथा इसके फ्रेमवर्क पर सहमति व्यक्त किए जाने की संभावना है। इस प्रथम चरण के करार पर सितम्बर-अक्टूबर 2025 में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
कृषि मंत्री के अनुसार अमरीका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार संधि के लिए बातचीत जारी है। लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि सरकार अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। जब दो देशों के बीच इस तरह के व्यापारिक करार के लिए वार्ता होती है तब उसे सम्पूर्ण व्यापार के परिप्रेक्ष्य में देखना आवश्यक होता है। दोनों पक्ष अधिक से अधिक फायदा उठाने और कम से कम नुकसान झेलने का प्रयास करते हैं।
नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार नई अमरीकी व्यापार एवं टैरिफ नीति के अंतर्गत भारत और अमरीका के बीच कृषि उत्पादों के कारोबार को संवर्धित करना आवश्यक होगा। पिछले कुछ वर्षों के दौरान अमरीका से भारत को लगभग 2.20 अरब डॉलर मूल्य के कृषि उत्पादों का निर्यात किया गया जबकि दूसरी ओर इसी अवधि में भारत से अमरीका को 5.75 अरब डॉलर मूल्य के कृषि एवं सकल उत्पादों का शिपमेंट किया गया। भारत से अमरीका को खासकर बासमती चावल एवं मसालों तथा काजू एवं समुद्री खाद्य उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है।
