अमरीका में भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लागू होने से वस्त्र उद्योग चिंतित
27-Aug-2025 01:53 PM
तिरुपुर। पूर्व घोषणा के अनुरूप ट्रम्प प्रशासन ने अनेक भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत का आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने हेतु 26 अगस्त को विधिवत अधिसूचना जारी कर दी और 27 अगस्त से नया टैरिफ प्रभावी हो गया।
इस नई टैरिफ से भारत के जिस क्षेत्र पर सर्वाधिक प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है उसमें वस्त्र उद्योग तथा कृषि क्षेत्र मुख्य रूप से शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि अमरीका भारतीय वस्त्र उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार है और भारत का सबसे प्रमुख व्यापारिक साझीदार भी है। वहां वियतनाम, चीन, बांग्ला देश एवं पाकिस्तान जैसे प्रतिद्वंदी देशों के मुकाबले भारतीय वस्त्र उत्पादों पर बहुत ऊंचा टैक्स लगा दिया गया है। अमरीका ने जान बूझकर भारत को टारगेट किया है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) का कहना है कि तिरुपुर (तमिलनाडु) नोएडा (उत्तर प्रदेश) और सूरत (गुजरात) में टेक्सटाइल एवं अपारेल निर्माताओं ने उत्पादन को रोक दिया है क्योंकि अमरीका में अत्यन्त ऊंचे टैरिफ के कारण भारतीय वस्त्र उत्पादों का निर्यात काफी घट जाने की आशंका है।
हालांकि भारत सरकार ने रुई पर लगे 11 प्रतिशत के आयात शुल्क को 30 सितम्बर 2025 तक स्थगित कर दिया है ताकि टेक्सटाइल उद्योग के लागत खर्च में कमी आ सके लेकिन इतना प्रयास पर्याप्त नहीं है।
7 अगस्त से भारतीय उत्पादों पर अमरीका में 25 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू था जिसे अब दोगुना बढ़ाकर 50 प्रतिशत निर्धारित किया गया है जो किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे ज्यादा है।
इसके अलावा भारत से अमरीका को समुद्री खाद्य उत्पाद, मसालों, बासमती चावल तथा काजू सहित कई अन्य उत्पादों का निर्यात भी बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।
दरअसल भारत ने अमरीका की दो प्रमुख मांगों को स्वीकार करने से इंकार कर दिया। अमरीका चाहता था कि भारत उसके जीएम मक्का तथा सोया उत्पाद के लिए अपना बाजार पूरी तरह खोल दे जबकि भारत में इसके आयात पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इसके साथ-साथ अमरीका भारत को रूस से पेट्रोलियम एवं रक्षा उपकरणों की खरीद रोकने के लिए कह रहा था जबकि भारत इसके लिए तैयार नहीं था।
अमरीका के साथ द्विपक्षीय व्यापार वार्ता का कोई सकारात्मक परिणाम सामने आने पर ही इस समस्या का समाधान संभव हो सकेगा। फियो के अनुसार भारत से 47-48 अरब डॉलर के उत्पादों का निर्यात अमरीका को होता है जिसके लगभग 55 प्रतिशत भाग के लिए 30-35 प्रतिशत मूल्य का अंतर होने की आशंका है। इससे अन्य आपूर्तिकर्ता देशों को फायदा होगा।
