अमरीका में सीमा शुल्क बढ़ने का भारतीय काजू उद्योग पर खास असर नहीं
05-Aug-2025 04:08 PM
मंगलोर। अमरीका में काजू सहित अन्य भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाने की जो घोषणा हुई है उससे भारतीय काजू के निर्यात पर प्रत्यक्ष रूप से मामूली असर पड़ने की संभावना है।
एक अग्रणी व्यापार विश्लेषक के अनुसार भारत से अमरीका को सीमित मात्रा में काजू का निर्यात होता है और इसलिए नए टैरिफ से भारतीय काजू क्षेत्र काफी हद तक अप्रभावित रहेगा।
लेकिन वहां यदि सभी आपूर्तिकर्ता देशों से आयात पर ऊंची दर का टैरिफ लगाया गया तो अमरीकी बाजार प्रसंस्कृत काजू का भाव बढ़ जाएगा।
काजू की कुल वैश्विक खपत में अकेले अमरीका की भागीदारी 18-20 प्रतिशत रहती है इसलिए यदि वहां मांग कमजोर पड़ी तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य प्रभावित हो सकता है।
वैसे समय गुजरने के साथ हालात सामान्य हो सकते हैं क्योंकि बाजार नए हालात के साथ सामंजस्य बैठाने में सफल हो सकता है। मई में अमरीका ने 10 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था और बाजार का इसके साथ सामंजस्य स्थापित हो गया है। नया टैरिफ भी धीरे-धीरे स्वीकार्य हो जाएगा और इसलिए कारोबार ज्यादा प्रभावित नहीं होगा।
विश्लेषक के मुताबिक अमरीकी काजू बाजार में भारत की भागीदारी बहुत कम है। फ्रेश या ड्राईड काजू की हिस्सेदारी महज 0.9 प्रतिशत तथा प्रिजर्व (संरक्षित) काजू उत्पादों की भागीदारी 6 प्रतिशत है।
अमरीका में मुख्यतः: वियतनाम इंडोनेशिया, ब्राजील एवं अफ्रीकी देशों से काजू का आयात किया जाता है। समीक्षकों के मुताबिक अमरीका द्वारा लगाया गया 25 प्रतिशत का टैरिफ (आगे और बढ़ सकता है) कारोबार के लिए अनुकूल नहीं है लेकिन अमरीकी बाजार में भारत की सीमित भागीदारी होने से तत्काल कोई विशेष नुकसान नहीं होगा।
यह देखना आवश्यक होगा कि वियतनाम जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों के साथ प्रतिस्पर्धा का अंतर कितना घटता-बढ़ता है। लेकिन कोट डी आइवरी एवं बेनिन जैसे अफ्रीकी देशों को भारी फायदा होने के आसार हैं क्योंकि एक तो अमरीका में उसके काजू पर केवल 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगेगा और दूसरे, इन देशों में काजू प्रोसेसिंग की नई-नई इकाइयां तेजी से स्थापित हो रही हैं। इससे भारत को वहां से कच्चे काजू का आयात करने में भारी कठिनाई हो सकती है।
