अमरीकी मक्का का आयात शुरू होने पर भारतीय किसानों को लगेगा आघात
19-Sep-2025 06:24 PM
नागपुर। भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) के लिए होने वाली बातचीत में अमरीका लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि भारत को इससे मक्का का भारी आयात शुरू करना चाहिए।
ध्यान देने की बात है कि अमरीका में उत्पादित मक्का का 94 प्रतिशत भाग जीएम श्रेणी का होता है और 6 प्रतिशत हिस्सा ही परम्परागत किस्मों का रहता है।
भारत में जीएम खाद्य उत्पादों के उत्पादन, आयात, कारोबार एवं उपयोग पर प्रतिबंध लगा हुआ है और सरकार इसे हटाना नहीं चाहती है इसमें मक्का और सोयाबीन भी शामिल है। पहले चीन में अमरीका से इन दोनों जिंसों का विशाल आयात हो रहा था मगर अब इसने इसकी खरीदारी बहुत घटा दी है।
अमरीका के वाणिज्य मंत्री ने कहा था कि भारत को अमरीकी मक्का की खरीद करनी चाहिए। यदि भारत सरकार ने कपास (रूई) की भांति मक्का को आयात शुल्क से मुक्त करने का निर्णय लिया तो इससे भारतीय उत्पादकों को भारी आघात लग सकता है। वैसे कुछ लोग एथनॉल निर्माण के लिए मक्का के आयात की अनुमति दिए जाने के पक्ष में है।
एथनॉल से उत्पादन में मक्का की खपत तेजी से बढ़ती जा रही है और आगे भी इसका सिलसिला जारी रहने की संभावना है। मक्का की कीमतों में पिछले दो वर्षों से मजबूती का माहौल बना हुआ है जिससे भारतीय किसानों को इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज का बिजाई क्षेत्र तथा उत्पादन बढ़ाने का अच्छा प्रोत्साहन मिल रहा है।
मौजूदा खरीफ सीजन में मक्का का रकबा बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। अगर अमरीका से विशाल आयात हुआ तो किसानों को अपने मक्के का लाभप्रद मूल्य प्राप्त करने में भारी कठिनाई हो सकती है।
जब महाराष्ट्र में विदर्भ संभाग के किसानों ने मक्का को सोयाबीन एवं कपास के एक बेहतर विकल्प के तौर पर अपनाना शुरू है तब अमरीका से इसके आयात की अनुमति का मामला सामने आ गया है।
अमरीकी जीएम मक्का अपेक्षाकृत सस्ता होता है और भारत में इसका शुल्क मुक्त आयात स्वदेशी किसानों के लिए घातक साबित हो सकता है।
मक्का अब विदर्भ संभाग के बुलढाणा एवं वाशिम तथा मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा एवं शिवनी जिले की प्रमुख फसल बन गया है। बुलढाणा एवं गढ़ चिरौली में गत दो वर्षों के दौरान मक्का के बिजाई क्षेत्र में तिगुनी बढ़ोत्तरी हो गई है।
