अमरीका द्वारा भारत पर एथनॉल के आयात की अनुमति देने हेतु दबाव
26-May-2025 05:25 PM
मुम्बई। द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के क्रम में अमरीका भारत पर जीएम मक्का एवं सोयाबीन के साथ-साथ एथनॉल तथा डीडीजीएस (डिस्टीलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सोल्यूबल्स) का आयात शुरू करने के लिए जोरदार दबाव डाल रहा है।
इससे भारत में गन्ना तथा अनाज आधारित एथनॉल उद्योग पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए कई दौर की बातचीत हो चुकी है और समझा जाता है कि जुलाई से पूर्व समझौते के पहले चरण की घोषणा हो सकती है क्योंकि उसके बाद अमरीका में नया टैरिफ नियम लागू होने वाला है।
यदि भारत सरकार द्वारा अमरीकी एथनॉल तथा डीडीजीएस के आयात की स्वीकृति प्रदान करती है तो इससे खासकर भारत के मक्का एवं गन्ना किसानों तथा एथनॉल निर्माताओं के हितों को नुकसान होने की आशंका बढ़ जाएगी।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने वर्ष 2030 तक पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य बढ़ाकर 30 प्रतिशत निर्धारित किया है और इसे हासिल करने के लिए नियमित रूप से प्रयास भी किया जा रहा है।
एथनॉल उत्पादन में बेहतर उपयोग होने से मक्का के दाम में सुधार आया है और किसानों को लाभप्रद मूल्य प्राप्त हो रहा है। गन्ना उत्पादकों को भी सही समय पर उचित मूल्य की प्राप्ति हो रही है।
चीनी उद्योग द्वारा एथनॉल निर्माण के लिए डिस्टीलरीज के विकास-विस्तार हेतु अच्छा निवेश किया गया है जबकि अनाज आधारित एथनॉल प्लांटों का भी दायरा बढ़ रहा है। ऐसी हालत में यदि अमरीका से एथनॉल एवं डीडीजीएस का भारी मात्रा में सस्ता आयात हुआ तो घरेलू उत्पादन में गिरावट का दौर शुरू हो जाएगा।
खाद्य तेल का मामला सबके सामने है। एक बार इसके आयात को नियंत्रण मुक्त किया गया तो कालान्तर में आयात तेजी से बढ़ते हुए नए-नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने लगा और अब सरकार तथा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए सिरदर्द बन गया है।
एथनॉल के मामले में भी ऐसा हो सकता है। सस्ते अमरीकी एथनॉल की प्रतिस्पर्धा का सामना करने में भारतीय निर्माताओं को भारी कठिनाई हो सकती है और धीरे-धीरे इसके उत्पादन के प्रति उसके उत्साह एवं आकर्षण में कमी आ सकती है।
इसके साथ-साथ घरेलू बाजार में मक्का तथा सोयाबीन की कीमतों में गिरावट आ सकती है क्योंकि डीडीजीएस के विशाल आयात होने पर सोयामील की घरेलू मांग एवं खपत काफी घट जाएगी। सोयामील का भाव नरम पड़ने से उद्योग की आमदनी घट जाएगी। पशु आहार निर्माण उद्योग पर भी असर पड़ सकता है।
