बाढ़-वर्षा से गुजरात में भी खरीफ फसलों को नुकसान

12-Sep-2025 12:21 PM

राजकोट। यद्यपि आमतौर पर मानसून की अधिशेष बारिश एवं नदियों में आई बाढ़ के कारण पंजाब एवं राजस्थान में खरीफ फसलों को हुए नुकसान की विशेष चर्चा हो रही है लेकिन हकीकत यह है कि इसके साथ-साथ जम्मू कश्मीर,

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, उड़ीसा एवं झारखंड तथा गुजरात के कुछ जिलों में भी प्राकृतिक आपदाओं से फसलें क्षतिग्रस्त हुई है। मध्य प्रदेश के कुछ जिले भी पहले बाढ़ की चपेट में आ गए थे। 

गुजरात क्षेत्र में मूंगफली, कपास तथा अरंडी का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य माना जाता है। वहां खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र सात वर्ष के 82.68 लाख हेक्टेयर से 36 हजार हेक्टेयर बढ़कर इस बार 83.04 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है।

इसके तहत धान, बाजरा, मूंगफली एवं अरंडी के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है और तुवर का रकबा भी कुछ बढ़ा है लेकिन दूसरी ओर मक्का, ज्वार, मूंग, उड़द, तिल, सोयाबीन, कपास और ग्वार के क्षेत्रफल में गिरावट आई है।  

अधिशेष वर्षा, खेतों में जल जमाव तथा नदियों के तराई वाले क्षेत्र में बाढ़ के प्रकोप से गुजरात के कुछ जिलों में खासकर दलहन-तिलहन एवं कपास की फसल को क्षति पहुंचने की आशंका है। वहां मानसूनी वर्षा का दौर अभी जारी है।

बारिश तो बिहार झारखंड में भी हो रही है मगर इससे धान की फसल को फायदा होने की उम्मीद की जा रही है। गुजरात में धान का रकबा 9 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है।

वहां मुख्यतः मूंगफली एवं कपास के बीच प्रतिस्पर्धा रहती है इस बार राज्य में मूंगफली की बिजाई 19.11 लाख हेक्टेयर से उछलकर 22.02 लाख हेक्टेयर पर पहुंची मगर कपास का रकबा 23.63 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 20.81 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। हैरानी की बात है कि गुजरात में मक्का का क्षेत्रफल भी 5 हजार हेक्टेयर घटकर 2.81 लाख हेक्टेयर के करीब रह गया है।