बाढ़-वर्षा से जम्मू कश्मीर में धान और सेब को नुकसान- आगे केसर की फसल को होगा फायदा

09-Sep-2025 06:05 PM

श्रीनगर। हालांकि जम्मू-कश्मीर में अत्यन्त मूसलाधार वर्षा होने तथा भयंकर बाढ़ आने से धान तथा सेब की फसल को काफी नुकसान होने की आशंका है। लेकिन आगामी महीनों में जब केसर की फसल के विकास का दौर शुरू होगा तब उसे अच्छी नमी का फायदा मिलने की उम्मीद है। बाढ़-वर्षा के कारण अनेक क्षेत्रों में धान के पौधे जमीन पर बिछ गए है जिससे उत्पादकों  को काफी नुकसान होने की आशंका है। 

केसर की फसल को मध्य अगस्त से मध्य सितम्बर तक अच्छी नमी की आवश्यकता पड़ती है। श्रीनगर के दक्षिण में स्थित पम्पोर क्षेत्र को केसर का प्रमुख उत्पादक इलाका माना जाता है।

उत्पादकों को इस वर्ष अनुकूल मौसम के कारण केसर का शानदार उत्पादन होने की आशा है। पिछले दो-तीन वर्षों से वहां मौसम प्रतिकूल चल रहा था जिससे केसर की फसल को नुकसान हो रहा था। 

आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले दो दशकों के दौरान कश्मीर में केसर के उत्पादन में तकरीबन 65 प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट आ गई जिसका कारण बिजाई क्षेत्र में कमी आना तथा मौसम की हालत खराब रहना माना जा रहा है।

1996-97 में वहां केसर का क्षेत्रफल 5700 हेक्टेयर से भी ज्यादा था मगर 2019-20 तक आते-आते यह घटकर 2387 हेक्टेयर रह गया।  

वर्ष 2023 में सरकार ने लॉजिस्टिक एग्रीकल्चर डवलपमेंट प्रोग्राम (एचएडीपी) के अंतर्गत केसर जैसी अति खास फसलों को संवर्धित- प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 146 करोड़ रुपए की राशि के साथ एक महत्वपूर्ण परियोजना को स्वीकृति प्रदान की थी।

वर्ष 2024 में जून-जुलाई के दौरान बारिश का अभाव होने तथा लम्बे समय तक तापमान ऊंचा रहने से सूखे का माहौल बनने से केसर के उत्पादन में 20-30 प्रतिशत की गिरावट आ गई। हालांकि इस वर्ष भी जून का महीना गर्म रहा मगर जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश होने से फसल की हालत काफी अच्छी हो गई है।