बंगाल में चावल तथा खाद्य तेलों का दाम घटने से उपभोक्ताओं को राहत
17-Sep-2025 01:23 PM
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार- नवरात्रि एवं दुर्गापूजा से पूर्व चावल तथा खाद्य तेलों के खुदरा मूल्य में गिरावट आने से आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार आम उपभोक्ताओं में सर्वाधिक लोकप्रिय किस्मों का भाव खुदरा बाजार में घटकर नीचे आया है जबकि खाद्य तेलों का थोक भाव घट गया है और चालू माह के अंत तक खुदरा बाजार में भी इसका असर दिखाई पड़ने लगेगा।
दरअसल बांग्ला देश ने इस वर्ष 10 लाख टन चावल के आयात का प्लान बनाया था जिससे बंगाल में इसका दाम उछल गया था। लेकिन अभी तक भारत से चावल की खरीद बहुत कम की गई है और ज्यादा ऑर्डर भी नहीं है इसलिए इसकी तेजी अब नरमी में बदल गई है।
आमतौर पर बांग्ला देश में भारत से अच्छी क्वालिटी के चावल का आयात किया जाता है जबकि अफ्रीकी देश मुख्यतः टूटे चावल की खरीद को प्राथमिकता देते हैं।
बांग्ला देश की कमजोर मांग के कारण पश्चिम बंगाल में मिनीकेट, स्वर्ण तथा सोना मसूर जैसे लोकप्रिय किस्मों के चावल का दाम घट गया है। इसी तरह उच्च क्वालिटी वाले सुगन्धित गोविंदभोग चावल का खुदरा मूल्य भी अब 220 रुपए प्रति किलो से घटकर अब 160 रुपए प्रति किलो पर आ गया है।
जहां तक खाद्य तेलों का सवाल है तो इसकी अधिकांश किस्मों का भाव थोक बाजार में सस्ता या नरम हुआ है। आमतौर पर त्यौहारी सीजन के दौरान खाद्य तेलों की मांग एवं खपत बढ़ने की परिपाटी रही है लेकिन सरकारी नीति के कारण इस बार उपभोक्ताओं को कुछ सस्ते दाम पर खाद्य तेल उपलब्ध हो सकता है।
एक अग्रणी उद्योग समीक्षक के अनुसार सरसों तेल की कीमतों में गिरावट आई है और आयातित खाद्य तेलों के दाम में भी नरमी देखी जा रही है। इसका असर सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल एवं पाम तेल पर पड़ने की पक्की संभावना है।
समीक्षकों के अनुसार खाद्य तेल की कीमतों में पिछले 6-7 महीनों से तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है और इसकी अगुवाई सरसों तेल कर रहा है।
चूंकि अब सरसों तेल के दाम में नरमी के संकेत मिल रहे हैं इसलिए सम्पूर्ण खाद्य तेल परिसर पर इसका असर पड़ने की संभावना है। सरसों तेल की खुदरा मांग में सुधार का कोई संकेत नहीं मिल रहा है जबकि इसकी पाइप लाइन पहले से ही भरी हुई है। विदेशों से आयातित खाद्य तेलों का भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
