बांग्ला देश से सुगन्धित चावल का निर्यात भारत के लिए चुनौती
22-Apr-2025 07:54 PM
नई दिल्ली। भारतीय व्यापारियों / निर्यातकों ने बांग्ला देश को भेजे जाने वाले चावल का निर्यात मूल्य बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा है कि बांग्ला देश सस्ते दाम पर भारतीय चावल का आयात कर रहा है और महंगे भाव पर अपने सुगंधित-श्रेणी के चावल का निर्यात कर रहा है।
इससे भारत में उत्पादित होने वाले विशेष किस्म के चावल जैसे सोना मसूरी, जीरा कसाला तथा प्रीमियम क्वालिटी के गैर बासमती चावल के लिए वैश्विक बाजार में चुनौती एवं प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। भारत को बांग्ला देश की प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए अपने विशिष्ट किस्म के चावल का निर्यात ऑफर मूल्य घटाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
डेढ़ वर्षों के बाद बांग्ला देश सरकार ने सुगंधित चावल के निर्यात की दोबारा अनुमति दी है सात वर्षों के पश्चात इसका निर्यात कोटा भी निर्धारित किया है। इससे भारतीय चावल का निर्यात प्रभावित होने की आशंका है।
बांग्ला देश भारतीय मूल के सस्ते चावल की खपत करता है मगर अपनी अच्छी क्वालिटी के चावल का निर्यात करना चाहता है। इससे लगभग 2.50 लाख टन भारतीय चावल के निर्यात पर असर पड़ सकता है।
यदि भारत का चावल वहां महंगे दाम पर उपलब्ध हुआ तो उसे विशिष्ट किस्म के चावल का निर्यात रोकने के लिए विवश होना पड़ सकता है लेकिन विडम्बना यह है कि बांग्ला देश को अधिक से अधिक मात्रा में चावल का निर्यात सुनिश्चित करने के लिए भारतीय निर्यातकों में आपस में ही होड़ मची हुई है।
एक समय ऐसा आएगा जब निर्यातक महज 1 डॉलर प्रति टन के न्यूतनम मार्जिन पर भी चावल का निर्यात करने से बाज नहीं आएंगे। इससे भारतीय चावल उद्योग को भारी नुकसान हो सकता है।
इस वर्ष बांग्ला देश ने 50-50 हजार टन की खेपों में कुल 6 लाख टन गैर बासमती सेला चावल का आयात सरकारी स्तर पर करने का प्लान बनाया है। हाल ही में इसके टेंडर बंद हुए हैं।
प्रथम टेंडर में चावल का निर्यात 477 डॉलर प्रति टन रहा था जो अंतिम टेंडर तक आते-आते घटकर 394.77 डॉलर प्रति टन रह गया। भारत वहां चावल का सबसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
