भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: क्या भारत देगा GM फसलों के आयात को मंज़ूरी?
05-Jul-2025 11:26 AM
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: क्या भारत देगा GM फसलों के आयात को मंज़ूरी?
★ भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बना रहा है कि वह जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों—जैसे सोयाबीन और मक्का—के आयात की अनुमति दे।
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भारत की वर्तमान नीति क्या कहती है?
★ फिलहाल भारत में किसी भी GM फसल के सीधे आयात पर प्रतिबंध है। हालांकि, GM सोयाबीन से निकले तेल के आयात की अनुमति है।
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सरकार की स्थिति और विशेषज्ञों की राय
★ सरकारी प्रवक्ताओं ने अभी तक GM फसलों के आयात को लेकर किसी भी नीति बदलाव से इनकार किया है। लेकिन विशेषज्ञों की राय इस पर बंटी हुई है—कुछ इसे संभावित मान रहे हैं तो कुछ इसे भारत के किसानों और उद्योगों के लिए खतरा बता रहे हैं।
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अगर भारत आयात की अनुमति नहीं देता
★ यदि भारत GM फसलों के आयात को नहीं खोलता, तो अमेरिका भारतीय उत्पादों जैसे चावल, मसाले, प्रॉसेस्ड ड्राई फ्रूट्स, ग्वारगम आदि पर टैरिफ बढ़ा सकता है। इससे भारत का निर्यात प्रभावित होगा और भारत को नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश करनी पड़ेगी।
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अगर GM सोयाबीन के आयात की अनुमति मिलती है
★ यदि भारत GM सोया के आयात की अनुमति देता है, तो सबसे पहले GMO नीति में बदलाव करना होगा। इसके बाद आयात, घरेलू प्रोसेसिंग, क्रशिंग, तेल और बाईप्रोडक्ट्स के उपयोग से जुड़े सभी नियमों में व्यापक बदलाव की ज़रूरत होगी।
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तेल उद्योग पर असर:
★ GM सोयाबीन की प्रोसेसिंग से एडिबल ऑयल और ऑयलमील दोनों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे एक ओर तो सोयातेल का आयात घट सकता है, लेकिन दूसरी ओर ऑयलमील की कीमतें और नीचे आ सकती हैं, जो पहले से ही DDGS के कारण दबाव में है।
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बड़ा सवाल—क्या बायप्रोडक्ट्स घरेलू बाज़ार में बिक पाएंगे?
★ यदि सरकार घरेलू बिक्री की अनुमति नहीं देती, तो इन बायप्रोडक्ट्स के लिए निर्यात के रास्ते तलाशने पड़ेंगे। भारत का ऑयलमील एक्सपोर्ट पहले से ही सुस्त चल रहा है, और GMO सोयामील की अंतरराष्ट्रीय कीमतें नॉन-GMO के मुकाबले कम होती हैं। ऐसे में बिना किसी इंसेंटिव के निर्यात व्यवहारिक नहीं होगा।
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★ अगर भारत GM फसलों के आयात की इजाजत देता है, तो यह केवल एक व्यापारिक निर्णय नहीं होगा—बल्कि यह पूरे कृषि और औद्योगिक ढांचे को प्रभावित करने वाला बड़ा कदम होगा।
★ इससे किसानों की आय पर असर पड़ेगा, घरेलू तेल उद्योग असंतुलन में आ सकता है।
