भारत में अमरीकी एथनॉल के आयात पर लगी पाबंदी से अमरीका नाखुश

09-Apr-2025 02:59 PM

नई दिल्ली। अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि ने भारत में अमरीका से एथनॉल के आयात पर लगे प्रतिबंध को अनुचित व्यापार प्रक्रिया बताते हुए इस पर अपनी नाखुशी जाहिर की है।


राष्ट्रीय व्यापार अनुमान रिपोर्ट में व्यापार प्रतिनिधि ने भारत, चीन, जापान तथा यूरोपीय संघ सहित कई अन्य देशों एवं व्यापारिक साझीदारों द्वारा लगाए गए 10 प्रमुख व्यापार अवरोधों की पहचान करते हुए कहा है कि अनुचित व्यापार प्रक्रिया से विकृति पैदा होती है


और अमरीका के उत्पादकों, निर्यातकों तथा श्रमिकों का हित प्रभावित होता है। रिपोर्ट में समान एवं निष्पक्ष बाजार पहुंच की जरूरत पर जोर देते हुए कहा गया है कि भारत में ईंधन उपयोग के लिए अमरीकी एथनॉल के आयात पर पाबंदी लगाई गई है। थाईलैंड ने भी ऐसा ही किया है।


इन देशों ने 2025 में ईंधन एथनॉल के आयात के लिए परमिट को स्वीकृति नहीं दी है। रिपोर्ट के अनुसार यदि भारत तथा थाईलैंड में एथनॉल के आयात की प्रक्रिया आरंभ हो जाए तो अमरीका को प्रति वर्ष कम से कम 41.40 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो सकती है। 


उल्लेखनीय है कि भारत में पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का अभियान बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है और इसके लिए स्वदेशी स्रोतों से एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।


गन्ना की पैदावार कम होने के बावजूद सरकार ने चीनी मिलों एवं डिस्टीलरीज को एथनॉल निर्माण के लिए गन्ना के नियंत्रण मुक्त उपयोग की स्वीकृति प्रदान की है और अनाज आधारित डिस्टीलरीज के लिए अपने स्टॉक से 2250 रुपए प्रति क्विंटल के रियायती मूल्य पर 24 लाख टन चावल का कोटा निर्धारित किया है।


इसके अलावा डिस्टीलरीज में एथनॉल उत्पादन के लिए मक्का की विशाल मात्रा का उपयोग भी होने लगा है। स्रोतों से उत्पादन एवं आपूर्ति बढ़ाने के लिए विदेशों से एथनॉल (ईंधन उद्देश्य के लिए) के आयात पर रोक लगाई गई है। गैर ईंधन उद्देश्य के लिए एथनॉल मंगाने हेतु आयातकों को सरकार से लाइसेंस लेना अनिवार्य है।


2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान भारत में पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का अंश फरवरी 2025 में बढ़कर 19.7 प्रतिशत पर पहुंच गया जबकि नवम्बर 2024 से फरवरी 2025 के दौरान यह 19 प्रतिशत तक पहुंचा था।