भारत में रूई का उत्पादन गत वर्ष से 4 लाख गांठ कम होने का अनुमान
11-Dec-2024 05:11 PM
मुम्बई । बिजाई क्षेत्र में करीब 14 लाख हेक्टेयर की भारी गिरावट आने तथा कुछ इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं से फसल को नुकसान होने से इस बार कपास (रूई) की घरेलू पैदावार घटने की संभावना है।
उद्योग-व्यापार संगठनों के साथ-साथ केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने भी रूई का उत्पादन कम होने का अनुमान लगाया है और अब अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) ने भी उत्पादन में कमी आने की संभावना व्यक्त की है।
उस्डा की नई मासिक रिपोर्ट के अनुसार भारत में रूई का उत्पादन 2023-24 सीजन के 254 लाख गांठ से 4 लाख गांठ घटकर 2024-25 के वर्तमान सीजन में 250 लाख गांठ पर सिमट जाने की संभावना है।
ध्यान देने की बात है कि भारत में कपास की प्रत्येक गांठ 170 किलो तथा रनिंग गांठ 160 लाख किलो की होती है जबकि उस्डा ने जो उत्पादन अनुमान व्यक्त किया है वह 480 पौंड (213 किलो) वजन की गांठ पर आधारित है। यह गांठ अमरीका में प्रचलित है।
उस्डा की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में चालू मार्केटिंग सीजन के आरंभ में करीब 93 लाख गांठ रूई का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद था जबकि 250 लाख टन गांठ का उत्पादन एवं 23 लाख गांठ का विदेशों से आयात होने की संभावना है।
इस तरह रूई की कुल उपलब्धता 366 लाख गांठ का विदेशों से आयात होने की संभावना है। इस तरह रूई की कुल उपलब्धता 366 लाख गांठ पर पहुंचेगी।
इसमें से 260 लाख गांठ रूई का घरेलू उपयोग तथा 13 लाख गांठ का निर्यात होगा और मार्केटिंग सीजन के अंत में पुनः 93 लाख गांठ का स्टॉक बच जाएगा।
इसके मुकाबले 2023-24 के मार्केटिंग सीजन में 108.20 लाख गांठ रूई का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद था, 254 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था और 8.90 लाख गांठ का विदेशों से आयात किया गया था।
इस कुल स्टॉक में से 255 लाख गांठ रूई की घरेलू खपत हुई जबकि 23.10 लाख गांठ का निर्यात किया गया। इसके बाद मार्केटिंग सीजन के अंत में 93 लाख गांठ रूई का अधिशेष स्टॉक बच गया।
ध्यान देने की बात है कि रूई के बकाया अधिशेष स्टॉक का उस्डा का अनुमानित आंकड़ा एक अग्रणी स्वदेशी संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों से बहुत बड़ा होता है और एसोसिएशन इस पर आपत्ति भी जता चुका है।
