भारत में और परम्परागत देशों से सस्ते पाम तेल का आयात बढ़ाने का प्रयास

27-Aug-2025 12:30 PM

मुम्बई। भारत के खाद्य तेल आयातक अब केवल परम्परागत आपूर्तिकर्ता देशों पर ही निर्भर नहीं रहना चाहता है। इसलिए नए -नए देशों से इसकी खरीद बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

अगस्त डिलीवरी के लिए पिछले 5 वर्षों में पहली बार संयुक्त अरब अमीरात से 6000 टन रेपसीड तेल का आयात अनुबंध किया गया है क्योंकि सरसों तेल का घरेलू बाजार भाव गत वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत उछलकर पिछले साढ़े तीन साल के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया है।

मार्च 2026 में सरसों की नई फसल तैयार होकर मंडियों में पहुंचने तक सरसों तेल का भाव ऊंचा एवं मजबूत रहने की उम्म्मीद की जा रही है।
 
भारत में परम्परागत रूप से मुख्यतः पाम तेल का आयात इंडोनशिया एवं मलेशिया से होता है जबकि अर्जेन्टीना एवं ब्राजील से सोयाबीन तेल तथा रूस एवं यूक्रेन से सूरजमुखी तेल मंगाया जाता है। इसके अलावा नेपाल सहित कुछ अन्य देशों से भी खाद्य तेलों का आयात होता है।
 
जुलाई में रेपसीड तेल का स्टॉक मूल्य उछलकर 1914 डॉलर प्रति टन की ऊंचाई पर पहुंच गया जो गत वर्ष से 34 प्रतिशत ज्यादा तथा फरवरी 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। कुछ आयातक सस्ते सोयाबीन तेल की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं जिससे इसका आयात तेजी से बढ़ रहा है। 

भारतीय आयातकों द्वारा पहली बार कोलम्बिया और ग्वाटेमाला जैसे देशों से पाम तेल की खरीद किए जाने की सूचना मिली है। वहां न केवल पाम तेल का अच्छा खासा स्टॉक मौजूद है बल्कि उसके उत्पादक रियायती मूल्य पर इसके निर्यात का ऑफर भी दे रहे हैं।

इसके अलावा वियतनाम से भी खाद्य तेल के आयात शुरू होने की संभावना है जहां एक बहुराष्ट्रीय  कम्पनी द्वारा क्रशिंग-प्रोसेसिंग प्लांट लगाया गया है।

थाईलैंड से भी खाद्य तेल का आयात बढाया जा रहा है। पिछले साल रूस तथा यूक्रेन के साथ-साथ रोमानिया से भी भारी मात्रा में सूरजमुखी तेल मंगाया गया था। 

भारतीय आयातक काफी बुद्धिमान और होशियार हैं। उन्हें जहां भी सस्ते दाम पर खाद्य तेल का ऑफर दिखता है वे वहां से इसकी खरीद शुरू कर देते हैं।

चीन से पिछले महीने सितम्बर-अक्टूबर डिलीवरी के लिए 1.50 लाख टन सोयाबीन तेल का आयात अनुबंध किया गया  लेकिन जब वहां भाव ऊपर रहने लगा तब भारत ने खरीदारी रोक दी।

कोलम्बिया तथा ग्वाटेमाला के निर्यातक अपने पाम तेल का निर्यात ऑफर मूल्य इतना नीचे रख रहे हैं ताकि इसका भारत पहुंच खर्च इंडोनेशिया और मलेशिया की तुलना में कुछ नीचे रह सके। वहां से माल आने में 45 दिन का समय लग जाता है।